कैबिनेट बैठक में सतपाल महाराज और हरक सिंह भिड़े

बुधवार को उत्तराखंड सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह और सतपाल महाराज के बीच जमकर बहसबाजी हुई. मंदिरों के व्यवस्थापन के लिए प्राधिकरण के गठन संबंधी सतपाल महाराज के प्रस्ताव से हरक सिंह खासे नाराज हुए और उन्होंने इसका विरोध किया.

बदरी-केदार मंदिर समिति गढवाल के अधिकांश मंदिरों का व्यवस्थापन करती है. इस मंदिर समिंति को त्रिवेन्द्र सिंह की सरकार ने बर्खास्त कर दिया था जो हाल ही में हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल हुई है. इस समिंति में कांग्रेस के सदस्यों का दबदबा है. सूत्रों का कहना है कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज नहीं चाहते कि भाजपा के शासनकाल में मंदिरों की देखरेख की जिम्मेदारी ऐसी समिति संभाले जिसके अधिकांश सदस्य कांग्रेसी विचारधारा के हैं.

इस कारण बुधवार को उन्होंने सभी मंदिरों के लिए प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का तर्क यह था कि कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र में स्थित मंदिरों की देखरेख के लिए प्राधिकरण बनाने की मांग की थी सतपाल महाराज के इस प्रस्ताव पर वन मंत्री हरक सिंह रावत भड़क गये. उन्होंने इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया और वह सतपाल महाराज से उलझ गये. हालांकि बहस के दौरान किसी असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं हुआ पर इससे साफ लगा कि हरक सिंह की नाराजगी की वजह कुछ और है. वह अपनी नाराजगी प्रकट करने के लिए कोई बहाना चाहते थे क्योंकि सतपाल महाराज ने सिर्फ प्रस्ताव रखा है अभी इस पर कानून नहीं बना है. सूत्रों का कहना है कि गढ़वाल का सर्वमान्य नेता बनने की होड़ में हरक सिंह और सतपाल महाराज एक दूसरे से टकरा रहे हैं.