नीतीश कुमार ने विपक्ष को फिर दिखाया ठेंगा, इस बार मामला उपराष्ट्रपति चुनाव का…

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से विपक्ष को जोर का झटका दिया है. वह उपराष्ट्रपति पद के साझा उम्मीदवार पर रणनीति बनाने के लिए 11 जुलाई को दिल्ली में आयोजित होने वाली 17 पार्टियों की बैठक में शामिल नहीं होंगे.

दरअसल, 11 जुलाई को ही जेडीयू ने अपनी पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक पटना में बुलाई है. ऐसे में उनकी पार्टी के विपक्ष की बैठक में हिस्सा न लेने की तस्वीर लगभग साफ हो गई है. मंगलवार को होने वाली 17 विपक्षी दलों की होने वाली बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी.

उधर, सूत्रों का कहना है कि जेडीयू पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव को बैठक में शामिल होने को कह सकती है. यह भी हो सकता है कि नीतीश कुमार विपक्ष के उम्मीदवार का अपनी पसंद के चलते समर्थन करें. वहीं, बीजेपी उन्हें अपने पक्ष में लाने के लिए बिहार से ही उपराष्ट्रपति पद के किसी उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है.

मजेदार बात यह है कि अप्रैल माह में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात करके नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करने की अपील की थी. लेकिन पिछले महीने उन्होंने अपने बयान से पलटी मारकर विपक्ष को तगड़ा झटका देते हुए एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया था.

उन्होंने ऐसा करने की दो वजहें बताई थीं- एक तो यह कि विपक्ष अंतिम समय तक उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर पाया. दूसरी यह कि रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने बिहार राज्य का मान बढ़ाया है. हालांकि नीतीश कुमार के कदम को बीजेपी से उनकी बढ़ती नजदीकी के रूप में देखा गया.

नीतीश कुमार की कांग्रेस से बढ़ती दूरी को देखते हुए, राहुल गांधी ने हस्तक्षेप करके रिश्तों में आई खटास को कम करने की कोशिश की थी. इसी क्रम में, उन्होंने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी के साथ दिल्ली में मीटिंग की थी. उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिया था.

नीतीश कुमार कांग्रेस द्वारा लालू यादव के घर पर हुई सीबीआई छापेमारी का खुलकर विरोध करने और लालू का पक्ष लेने के कारण नाराज हैं. वहीं, कांग्रेस से उलट जेडीयू ने सीबीआई छापेमारी पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. रोचक बात यह है कि 2008 में नीतीश कुमार की पार्टी ने ही सबसे पहले लालू यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिनकी जांच अब सीबीआई द्वारा की जा रही है. उस समय बिहार में नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच छत्तीस का आंकड़ा था. बाद में, नीतीश कुमार ने बीजेपी से 17 साल पुराना गठबंधन तोड़कर लालू से नाता जोड़ लिया था. हालांकि कुमार ने नए संकेतों से लगता है कि वे एक बार फिर अपने पुराने साथी बीजेपी से नाता जोड़ सकते हैं.