सुप्रीम कोर्ट ने IIT एडमिशन पर पहली बार लगाई रोक, 50 हजार स्टूडेंट्स पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs) में ज्वाइंट एंट्रेस एग्जामिनेशन (JEE) (एडवांस) के तहत हो रही काउंसलिंग और एडमिशन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. इस फैसले का असर 50455 स्टूडेंटस पर पड़ेगा. बता दें कि इस एग्जाम में ग्रेस मार्क्स देने को पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने केंद्र सरकार और आईआईटी मद्रास को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. हालांकि, रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

जस्टिस दीपक मिश्रा और एके खानविलकर की बेंच ने कहा- “देश का कोई भी हाईकोर्ट अब से जेईई-आईआईटी (एडवांस) की किसी पिटीशन पर विचार नहीं करेगा. कोर्ट ने हाईकोर्ट के सामने पेंडिंग पिटीशन की जानकारी भी मांगी है. साथ ही JEE रैंक लिस्ट को चुनौती देने वाली पिटीशंस के बारे में जानकारी देने को कहा है. केस पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी.

2 लाख कॉपी फिर जांचना मुश्किल: सरकार

विकास सिंह (पिटीशनर्स के वकील): सभी को ग्रेस देना बाकी स्टूडेंट्स के अधिकारों का हनन है.

जस्टिस दीपक मिश्रा: समाधान एक ही है. जिन्होंने सवाल हल करने की कोशिश की उन्हें ही ग्रेस दें. हम 2005 में दिए इस कोर्ट के फैसले के मुताबिक जाएंगे. जिन्होंने कोशिश नहीं की, उन्हें बोनस मार्क्स क्यों दें?

केके वेणुगोपाल (अटॉर्नी जनरल): जेईई में निगेटिव मार्किंग थी. मुमकिन है कि मार्क्स कटने के डर से कुछ स्टूडेंट्स ने गफलत वाले सवालों के जवाब न दिए हों. इसलिए सबको ग्रेस दिए. नहीं तो इन सवालों के मार्क्स हटाने पड़ते. दो लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी. सबकी आंसर शीट फिर जांचना मुश्किल था. इसलिए सभी छात्रों को एक जैसे 18 ग्रेस मार्क्स देने का फैसला किया गया था. वैसे भी अब तक 33 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स दाखिला ले चुके हैं.

जस्टिस मिश्रा: 33 हजार स्टूडेंट्स का फ्यूचर पहले ही अधर में लटक चुका है. आखिरी उपाय के तौर पर आईआईटी जेईई-2017 के आधार पर आगे दाखिले न करें. गलत सवालों के बोनस मार्क्स देने की लीगलिटी पर फैसले के बाद ही आईआईटी में दाखिले किए जाएं.

देश में 3289 इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट हैं. इनमें 23 आईआईटी, 31 एनआईटी और 19 आईआईआईटी हैं. इन इंस्टीट्यूशंस में इंजीनियरिंग की कुल 15 लाख 53 हजार 809 सीटें हैं.

दरअसल, JEE- 2017 एडवांस के एग्जाम में उन स्टूडेंट्स को भी ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, जिन्होंने सवाल को हल करने की कोशिश भी नहीं की थी. नियम के मुताबिक, ग्रेस मार्क्स सिर्फ उनको ही दिए जाते हैं, जो सवाल छोड़ने के बजाए उन्हें हल करने की कोशिश करते हैं. इस एग्जाम में सभी स्टूडेंट्स को 18 ग्रेस मार्क्स दिए गए थे.

पिटीशन में यह आरोप लगाया गया था कि ग्रेस मार्क्स से एग्जाम की मेरिट लिस्ट पर असर हुआ है, इसलिए दोबारा लिस्ट तैयार की जाए.

1) रिजल्ट पर क्या असर हुआ?
जेईई एग्जाम्स के एक्सपर्ट्स रमेश बतलिश के मुताबिक- कुछ सवालों में कन्फ्यूजन था. इस वजह से ग्रेस मार्क्स दिए गए. आंसर-की पर छात्रों का फीडबैक मिलने के बाद आईआईटी मद्रास ने पहले 11 और फिर 7 मार्क्स दिए. असर यह है कि कटऑफ 126 रह गया. पिछले साल 100 था.

2) इतने बोनस मार्क्स देना सही है या गलत?

बतालिया ने कहा कि यह मेहनती स्टूडेंट्स के साथ खिलवाड़ है. सिर्फ सवाल छूकर आए छात्रों को बेवजह फायदा मिला. जेईई यह अब तक का सबसे ज्यादा ग्रेस है. पहले दो बार 10 और एक बार 11 मार्क्स के ग्रेस दिए गए थे.

SC ने सरकार को नोटिस जारी किया था

इस एग्जाम में बैठने वाली एक स्टूडेंट ऐश्वर्या अग्रवाल ने पिटीशन दायर कर मांग की थी कि जेईई 2017 की रैंक लिस्ट को रद्द किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा था. कोर्ट ने आईआईटी मद्रास की एग्जाम कंडक्ट करने वाली बॉडी‌ से पूछा था कि ऐसे स्टूडेंट्स को 7 एडिशनल ग्रेस मार्क्स क्यों दिए गए, जिन्होंने सवालों के जवाब देने की कोशिश ही नहीं की. इस एग्जाम में 50455 स्टूडेंट्स ने क्वालीफाई किया था. जेईई एडवांस्ड 2017 में 10 हजार 957 सीटों के लिए 1 लाख 59 हजार 540 स्टूडेंट्स अपीयर्ड हुए थे. इसमें 50 हजार 455 स्टूडेंट्स ने क्वालीफाई किया था. इनमें 43 हजार 318 ब्वॉयज और 7 हजार 137 गर्ल्स थीं.