कब्रिस्तान बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जिंदा लोगों के रहने की जगह नहीं है: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली में जिस तरह से कब्रिस्तान फैलते जा रहे हैं, लोगों को रहने के लिए जगह नही मिलेगी. दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच ने यह टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ने के साथ ही मृत्यु दर भी बढ़ रही है. लेकिन जमीन उतनी ही है.

अधिकारियों से कहा, जिस तरह से आप कब्रिस्तानों का विस्तार कर रहे हैं, लोगों को रहने की जगह नहीं मिलेगी. केवल कब्रों के लिए जगह रहेगी. अब जिन लोगों की मृत्यु होगी उनकी अंत्येष्टि कहां करेंगे. उन्होंने अधिकारियों से अन्य देशों में दफनाने के तरीकों के बारे में पता लगाने को कहा है.

बेंच ने कहा कि ईसाइयों के कब्रिस्तान को लेकर समस्या पेश रही है. हिंदुओं ने विद्युत शवदाह गृह का उपयोग शुरू किया है क्योंकि पेड़ कम हो रहे हैं और अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी मिलना मुश्किल हो जाएगा. मुसलमानों के लिए क्या विकल्प है? दिल्ली में अमीर खुसरो पार्क में अवैध निर्माण संबंधी अर्जियों पर बेंच सुनवाई कर रही थी.