उत्तराखण्ड : 5500 ग्राम प्रधानों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

देहरादून, सोमवार को उत्तराखंड के 5500 ग्राम प्रधानों ने ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त से मिलने वाली मद में कटौती करने के विरोध में जिला पंचायतीराज अधिकारी को सामूहिक त्यागपत्र सौंपा.जिससे राज्य सरकार की नींद उड़ गई है. बताया जा रहा है कि राज्य वित्त आयोग की ओर से ग्राम पंचायतों के बजट में कटौती के विरोध में सोमवार को राज्य के 5500 ग्राम प्रधानों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। प्रधानों के सामूहिक इस्तीफे ने सूबे की सियासत गर्मा दी है, वहीं ग्राम प्रधानों ने मानदेय 750 से बढ़ाकर 5000 रुपये करने और पंचायतीराज एक्ट लागू होने के बाद नियमावली जल्द लागू करने की मांग उठायी है और प्रधान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं.

ग्राम प्रधानों का कहना है कि जब से केन्द्र सरकार ने जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत को धन आवंटित करना बंद किया, तब से राज्य सरकार राज्य वित्त का जो पैसा ग्राम पंचायतों को मिलता था उसमें कटौती कर जिला पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों को दे रही है यह धनराशि लगभग 65 प्रतिशत है जिसमें सरकार कटौती कर रही है ग्राम प्रधानों का कहना है कि ग्राम पंचायतों के माध्यम से जनहित के कार्य धरातल पर उतारे जाते हैं लिहाजा राज्य सरकार राज्य वित्त की शतप्रतिशत धनराशि ग्राम पंचायतों को आवंटित करें

विदित रहे कि केन्द्र सरकार से मिलनी वाली धनराशि अब सीधे ग्राम प्रधानों के खाते में जा रही है, जबकि जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों को धन आवंटित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल दी है केन्द्र सरकार ने इनकी मद को बंद कर दिया है राज्य सरकार भी अलग से धन की व्यवस्था करने के बजाय ग्राम पंचायतों की राज्य वित्त की मद में से लगभग 65 प्रतिशत कटौती कर जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों को दे रही है इसका पिछली कांग्रेस सरकार ने बाकायदा जीओ जारी कर दिया था, लेकिन ग्राम प्रधानों के दबाव में फिर रद्द कर दिया था एक बार फिर राज्य सरकार ग्राम पंचायतों की मद में कटौती करने जा रही है जिसका सभी ग्राम प्रधान प्रबल विरोध कर रहे हैं.त्यागपत्र सौंपने वालों ग्राम प्रधान राजावाला देवकी बिष्ट, ग्राम प्रधान पुरकल गांव, प्रतीत नगर, जोहड़ी गांव दुर्गेश थापा, ग्राम प्रधान भगवन्तपुर और ग्राम प्रधान अनिता थापा आदि प्रमुख हैं