ओवैसी ने गोरक्षकों के खिलाफ पीएम मोदी के बयान को बताया पाखंड, विपक्ष ने कहा खोखला बयान

ऑल इंडिया मजलिए-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या की निंदा केवल पाखंड है. अहमदाबाद में मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने कहा कि गोरक्षकों को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तथा संघ परिवार से शह मिल रही है.

देश के विभिन्न हिस्सों में हत्याओं की ओर इशारा करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘यह केवल पाखंड है. हमलों की संख्या बढ़ी है.’ उन्होंने कहा कि यह विचित्र बात है कि जीवन का अधिकार जानवरों को दिया जा रहा है, जबकि लोगों को मारा जा रहा है.

इससे पहले अपने ट्वीट में ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयानों का जमीनी स्तर पर इच्छित प्रभाव नहीं होगा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री ने दो बार कहा, लेकिन इसका इच्छित परिणाम सामने नहीं आया, क्योंकि गोरक्षकों को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर बीजेपी या संघ का समर्थन प्राप्त है. जमीनी स्तर पर कुछ भी बदलने नहीं जा रहा.’

ओवैसी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने कहा कि हत्या अस्वीकार्य है, लेकिन पहलू खान के कथित तीन हत्यारों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है, जबकि राजस्थान में बीजेपी ही सत्ता में है. प्रधानमंत्री की कथनी तथा करनी में फर्क है.’

सांसद ने कहा, ‘अगर आप गाय को मारने वाले किसी व्यक्ति को मौत की सजा सुना सकते हैं, तो फिर हत्या करने वाले किसी व्यक्ति को मौत की सजा क्यों नहीं सुना सकते?’ उन्होंने कहा कि कानून का शासन सुनिश्चित करना सरकार का काम है.

लोकसभा सांसद ने कहा कि वह ‘भीड़तंत्र तथा हत्या’ को रोकने के लिए आगामी मानसून सत्र में एक निजी विधेयक पेश करेंगे.

गौरक्षकों पर मोदी का बयान खोखला
विपक्षी दलों के नेताओं ने गुरुवार को गौरक्षकों के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी के आए बयान की गंभीरता को लेकर सवाल खड़े किए हैं और उनके बयान को खोखला बताया है. विपक्षी नेताओं ने कहा कि पीएम मोदी ने पहले भी कई बार चेतावनी दी थी, जिसका ज्यादा असर नहीं देखा गया.

पीएम मोदी गुरुवार को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि गौ-भक्ति के नाम पर हत्या को स्वीकार नहीं किया जा सकता और किसी को अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार नहीं है.

उनके इस बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को खुद से पूछना चाहिए कि किसने इस देश में अराजकता का माहौल बनाया है. औपचारिकता के तौर पर आलोचना पर्याप्त नहीं है. प्रधानमंत्री को इसकी पुष्टि करनी चाहिए कि वह भारत के संस्थापक मूल्यों में विश्वास करते हैं.’

वहीं, महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि मोदी साबरमती आश्रम गए, उन पर गांधी जी की आत्मा की मौजूदगी का असर पड़ना चाहिए.

गोपालकृष्ण गांधी ने कहा, ‘उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह पूरी तरह से सही है, लेकिन इसका जमीनी तौर पर कड़ी कार्रवाई के साथ पालन किया जाना चाहिए. सभी अपराधियों (नफरत फैलाने वालों) को पकड़ा जाना चाहिए. उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और जनता का कानून व व्यवस्था में विश्वास बहाल किया जाना चाहिए.’

उन्होंने उम्मीद जताई कि पीएम मोदी के बयान से बदलाव की शुरुआत होगी. जेडीयू के प्रवक्ता के.सी. त्यागी ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के बयान में कोई तत्व नहीं दिखाई देता.

त्यागी ने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि प्रधानमंत्री की तथाकथित चेतावनी गौरक्षकों के लिए कोई मायने रखती है. प्रधानमंत्री पहले भी गौरक्षकों पर बोल चुके हैं, लेकिन इसका जमीनी हकीकत पर थोड़ा ही असर हुआ. वास्तव में वह हर बार इस तरह की सलाह गौरक्षकों को देते हैं, इसके बावजूद गाय के नाम पर हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. आज ही झारखंड में एक इंसान की जान ले ली गई.’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि गोमांस खाने या गोवध के नाम पर लोगों की पीट-पीटकर की जाने वाली हत्याएं रुकनी चाहिए और इस पर सिर्फ बयानबाजी काफी नहीं है.

ममता ने ट्वीट कर कहा, ‘हम गौरक्षा के नाम पर हत्याओं की निंदा करते हैं. इस पर रोक लगनी चाहिए. इसके लिए सिर्फ बयान पर्याप्त नहीं हैं.’

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख व लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी के बयान को महज ‘होठों की जुंबिश’ करार दिया और कहा कि गौरक्षक कभी सीधे तौर पर तो कभी अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी व संघ परिवार का समर्थन पा रहे हैं.

माकपा के नेता डी. राजा ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में शामिल लोगों पर कड़ी व ठोस कार्रवाई की मांग की. राजा ने कहा, ‘मोदी बोल रहे हैं ठीक, लेकिन कार्रवाई क्या हुई? वह बार-बार सुझाव क्या दे रहे हैं. गाय के नाम पर पीट-पीटकर हत्या की सभी घटनाएं बीजेपी शासित राज्यों में हो रही हैं. सभी जानते हैं गौरक्षकों को कौन संरक्षण दे रहा है.’

आरजेडी के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि पीएम मोदी के शब्द खोखले हैं. उन्होंने हा, ‘प्रधानमंत्री के शब्द खोखले प्रतीत होते हैं. उन्होंने देरी से रोहित वेमुला और उना में दलितों के उत्पीड़न पर इस तरह के बयान दिए हैं. क्या इस तरह की घटनाएं रुकीं? वास्तव में इस तरह के गौरक्षक समूहों पर हकीकत में कोई कार्रवाई नहीं हुई. राष्ट्र को भीड़ द्वारा हत्या किए जाने पर तत्काल कानून बनाए जाने की जरूरत है.’

पूरे देश में बुधवार को कई शहरों में ‘नॉट इन माइ नेम’ अभियान के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में हाल के दिनों में गाय को बचाने के नाम पर भीड़ द्वारा की गई हत्याओं के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन किया गया.