तो इस विज्ञापन के लिए विवादों में खट्टर सरकार

चंडीगढ, हरियाणा में बीजेपी की मनोहर लाल सरकार के बनने के दो साल बाद बेटी पढ़ाओ आंदोलन बेटी छुपाओ में तब्दील होता जा रहा है. बेटी छुपाओ के तहत राज्य में महिलाओं के गर्व के लिए उन्हें ढंककर रहने की वकालत की जा रही है. राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए एक बुकलेट जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि ‘घूंघट’ में महिला जो कि राज्य की पहचान है. कृषि संवाद के मार्च इशू मे मुख्यमंत्री की एक बड़ी से स्माइल वाली कवर पेज पर फोटो लगी हुई. वहीं इसके सबसे आखिरी पेज पर एक महिला दिखाई गई है जिसका पूरा चेहरा एक चुन्नी से ढंका हुआ है जो कि अपने सिर पर मवेशियों का चारा ढो कर ले जा रही है. इस फोटो के कैप्शन में दिया है, “घूंघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान”.

एक तरफ तो राज्य सरकार सेल्फी विद डॉटर जैसा अभियान चलाती, जिससे कि राज्य के महिला सेक्स रेट में वृद्धि आए. इसके साथ ही सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसा नारा देती है जिससे कि राज्य की लड़कियां आगे पढ़े-लिखे और राज्य का नाम रोशन करें तो वहीं दूसरी ओर महिला को ढंककर रखा जा रहा है जो कि अपने महिलाओं के सशक्तिकरण को पिछले पचास सालों की तरफ ढकेल रहा है. राज्य के कई हिस्सों में धार्मिक कानून की आड़ में महिलाओं के साथ तानाशाही की जा रही है. लोग ऐसा दिखाते हैं कि महिलाएं केवल सम्मान जताने के लिए पुरुषों के सामने घूंघट करती हैं, जिसके पीछे साफ पता चलता है कि पुरुष महिलाओं से ज्यादा बेहतर हैं.

राज्य में ऐसे कई गैर-सरकारी संगठन हैं जो कि महिलाओं को घूंघट से मुक्ति दिलाने के लिए अभियान चला रहे हैं. वहीं इस बारे में मनोहर लाल के करीबी जवाहर यादव ने कहा कि एक फोटो के आधार पर कोई फैसला नहीं लिया जाता. हम नहीं चाहते कि प्रदेश की महिलाएं घूंघट में रहें. इस मामले पर अब दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने भी बयान देना शुरु कर दिया है. इस पर कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि यह बीजेपी सरकार की मानसिक प्रवृति का झलकाता है. सरकार राज्य की महिलाओं को केवल गुलाम और बस इस्तेमाल करने वाली वस्तु के रूप में बनाकर रखना चाहती है. उन्हें इस बात का एहसास भी नहीं है कि हरियाणा की महिलाएं हर फील्ड में अपना बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखा रही हैं, चाहे वो कुश्ती हो या बॉक्सिंग. महिलाएं खेल से लेकर किसी भी अन्य फील्ड में पुरुषों से पीछे नहीं हैं. सुरजेवाला ने कहा कि महिलाओं को घूंघट में रखने का काम 19वीं सदी में किया जाता था लेकिन बीजेपी 21वीं सदी में भी ऐसा कर रही है.