नई दिल्ली : आप को लगा चुनाव आयोग से जोरदार झटका

नई दिल्ली, आम आदमी पार्टी को चुनाव आयोग से जोरदार झटका लगा है. ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में जारी चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में आम आदमी पार्टी की दलीलें खारिज कर दी हैं. दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही विधायकों की विवादित पद पर नियुक्ति को अवैध ठहरा चुका है. चुनाव आयोग लाभ के पद के मामले में सुनवाई कर रहा है. आम आदमी पार्टी ने अपील की थी कि जब दिल्ली हाई कोर्ट ने नियुक्तियां ही रद्द कर दी तो अब आयोग को सुनवाई करने का ना कोई औचित्य है और न ही जरूरत. आयोग ने इस दलील और अपील को दरकिनार कर दिया है. अब राष्ट्रपति को भेजे जाने वाली राय के लिए सुनवाई होगी. सुनवाई के बाद आयोग राष्ट्रपति को अपना मत भेजेगा कि इन विधायकों की नियुक्ति की वैधता पर उठे सवालों के जवाब क्या हैं. साथ ही इनकी सदस्यता का क्या हो.

आम आदमी पार्टी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के हालिया आदेश का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति के आदेश को रद्द घोषित कर दिया था. इसलिए, दिल्ली उच्च न्यायालय के अनुसार इस विषय के संबंध में याचिका पर सुनवाई का कोई सवाल ही नहीं बनता है. हालांकि, चुनाव आयोग ने आदेश दिया है कि वह अभी इस याचिका पर सुनवाई करेंगे. चुनाव आयोग के इस आदेश को चुनौती देने के लिए सभी उपाय उपलब्ध हैं, हम माननीय उच्च न्यायालय के साथ ही माननीय चुनाव आयोग के आदेशों का सम्मान करते हैं.

चुनाव आयोग में आम आदमी पार्टी के 27 विधायकों के खिलाफ ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के तहत शिकायत की गई थी. आयोग में शिकायत की गई थी कि अपने इलाके के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में 27 विधायक रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष बनाए गए है, जबकि केंद्र सरकार की 2015 की गाइडलाइंस के हिसाब से सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री, क्षेत्रीय सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष या फिर जिलाधिकारी ही रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष बन सकते हैं. क्षेत्रीय विधायक केवल इस समिति का सदस्य ही बन सकता है या मनोनीत किया जा सकता है. सभी 27 विधायकों को हर अस्पताल में ऑफिस की जगह दी गई है. कई अधिकारी इस पर अपना विरोध भी जता चुके हैं.