अलविदा जुमे की नमाज अदा कर मांगी कौम व देश की तरक्की की दुआएं

रुड़की,रहमतों और बरकतों के माह रमजान के अलविदा जुमे की नमाज नगर एवं आसपास के क्षेत्र की मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई. नगर की प्रमुख जामा मस्जिद के मौलाना अजहरूल हक ने अपना बयान अलविदा तुमे पर पेश किया तो कारी कलीमुद्दीन ने नमाज पढाई. अपने खिताब में मौलाना अजहरूल हक ने कहा कि रमजान मुसलमानों के लिए अल्लाह का एक अजीम तोहफा है. जिसमें अल्लाह की जितनी इबादत की जाए कम होती है, क्योंकि हमारी नेक नीयत और इबादत के बाद ही हमें अपने गुनाहों से माफी मिलती है. मुफ्ती मो. सलीम व मौलाना अरशद कासमी ने कहा कि इस्लाम में नमाज के बाद जकात की बड़ी अहमियत होती है. जकात का अर्थ होता है पाकिजा (शुद्धता ) जिसके करने से इंसान की जान और माल दोनों ही पाकिजा हो जाते हैं.

सिविल लाइन स्थित मस्जिद के ईमाम जावेद आलम ने ईद को अल्लहा की तरफ से ईनाम करार दिया और कहा कि ईद एक ऐसा त्योहार है जिसे मिलजुलकर मनाने से उसकी खुशी के रंग गहरे हो जाते हैं. कारी मजाहिर हुसैन, मौलाना नसीम कासमी, मौलवी मो. हारून, मौलाना मो. युसुफ, कारी शमीम अहमद, मौलाना मुसर्रत अली, कारी नफीस अहमद आदि के अलग-अलग मस्जिदों में रोजेदारों को अलविदा जुमे की नमाज अदा कराई.

वहीं दूसरी ओर सिविल लाइन स्थित जामा मस्जिद में सत्ताइसवें रमजानुल मुबारक के मौके पर कलाम पाक पूरा हो गया. जिसके बाद सभी ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी और कौम व देश की तरक्की के लिए दुआऐं मांगी. इस दौरान समाजसेवी मुजीब मलिक, मुनव्वर हुसैन, शहर काजी अमीर अहमद, शायर अफजल मंगलौरी, कारी हबीबुल्ला, डा. इरशाद मसूद, तौफीक अहमद, अहमूद अली, जलीजुर्रहमान खान, जाकिर त्यागी, मोहसीन खान, मौलवी जमील अहमद, महमूद अली, नावेद अली, अताउर्रहमान, इमरान देशभक्त आदि ने शिरकत की.