आईएस ने मोसुल में ऐतिहासिक मस्जिद तबाह की

मोसुल|… इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों ने इराकी शहर मोसुल में 12वीं सदी में निर्मित मस्जिद ‘अल नूरी’ को ध्वस्त कर दिया. एफे न्यूज के मुताबिक, इराकी संयुक्त ऑपरेशन्स कमान के प्रवक्ता याहया रासौल ने रुडॉ टीवी को बताया कि आईएस ने मस्जिद को उस समय उड़ा दिया जब वे शहर से भागने की तैयारी में थे.

 

हालांकि, जिहादी न्यूज एजेंसी अमाक द्वारा प्रसारित एक संदेश में आईएस ने दावा किया कि उससे मोसुल को वापस हासिल करने के लिए लड़ रहे गठबंधन की बमबारी में मस्जिद ध्वस्त हुई.आईएस द्वारा मोसुल पर कब्जा करने के कुछ ही समय बाद आईएस प्रमुख अबु बकर अल-बगदादी ने अल नूरी मस्जिद में 29 जून, 2014 को एक इस्लामिक खिलाफत की घोषणा की थी.

इराकी सेना ने अक्टूबर, 2016 में मोसुल को आईएस के कब्जे से छुड़ाने का अभियान शुरू किया था और पिछले सोमवार को सेना ने जिहादियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई की.

क्यों खास है अल-नूरी मस्जिद

–    यह मस्जिद आईएसआईएस और उसके खिलाफ लड़ रहे पक्ष दोनों के लिए महत्व रखती है.

–    बगदादी ने  यहीं पर जुलाई 2014 में खलीफा राज्य स्थापित करने की घोषणा की थी, इसके बाद उसके लड़ाकों ने मोसुल शहर पर कब्जा कर लिया था.

–    1172 में मोसुल और अलप्पो के तुर्क शासक नूर अल-दन महमूद जांगी ने इस मस्जिद के निर्माण का आदेश दिया था. इसलिए मस्जिद का नाम उसके नाम पर ही रखा गया.

–    नूर अल-दीन क्रूसेड (ईसाइयत के लिए जंग)  के खिलाफ जेहाद शुरू करने और मुसलमानों को एकसाथ लाने के लिए जाने जाते है.

–    इस मस्जिद से लगी हुई हदबा (कुबड़ी) मीनार बेहद खास  मानी जाती है.यह मीनार एक ओर झुकी हुई है.