कैलाश-मानसरोवर यात्रियों के लिए इस बार भी इस परेशानी का कोई हल नहीं

कैलाश-मानसरोवर की यात्रा में वैसे ही पग-पग पर चुनौतियां हैं और अगर आप इस तीर्थयात्रियों पर जा रहे हैं तो आपके लिए यह खबर पढ़ना जरूरी है. अगर आप वहां जा रहे हैं तो आपको ये परेशानी झेलनी पड़ सकती है.

दरअसल, कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने कैलाश-मानसरोवर यात्रियों को गुंजी से नाभीढांग तक वाहनों से ले जाने की योजना साल 2016 की यात्रा के समय ही तैयार कर ली थी, लेकिन इसे इस बार भी लागू नहीं किया जा सका है.

सीमा सड़क संगठन ने गुंजी से नाभीढांग तक 18 किमी लंबी सड़क का निर्माण चार वर्ष पूर्व कर लिया था. केएमवीएन ने पिछले साल यह तैयारी की थी कि गुंजी में हेलीकॉप्टर से कम से कम दो जीपों को उतारा जाए और उनमें यात्रियों को नाभीढांग तक ले जाया जाए.

पिछले साल सारी तैयारी के बावजूद इस पर अमल नहीं हो पाया, लेकिन इस बार केएमवीएन ने गुंजी से नाभीढांग के बीच वाहन चलाने के विचार को पूरी तरह छोड़ दिया है.

केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि हेलीकॉप्टर से जीपों को गुंजी तक पहुंचाने में बहुत ज्यादा खर्च आने वाला है. जीपों को ले जाने के लिए एमआई 17 हेलीकॉप्टर की जरूरत पड़ेगी.

पिछले साल एक बार इस तरह की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन जीप को हेलीकॉप्टर से भेजने का खर्चा ज्यादा आने के कारण इस प्रस्ताव को को वापस लेना पड़ा. इस बार इस तरह का प्रस्ताव तैयार ही नहीं किया गया.

इस कारण यात्रियों को गुंजी से नाभीढांग तक पैदल जाना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि जब तक धारचूला से गुंजी तक रोड पूरी नहीं बन जाती तब तक यात्रियों को नारायण आश्रम से आगे का सफर पैदल ही तय करना पड़ेगा. सड़क कब तक पूरी होगी कहा नहीं जा सकता. इस बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर 18 दल जाएंगे.

प्रथम कैलाश-मानसरोवर यात्री दल का एक सदस्य गुंजी में फिर से हुए स्वास्थ्य परीक्षण में अनफिट हो गया. उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. दिल्ली निवासी 54 वर्षीय जसवंत को गुंजी से आगे की यात्रा पर जाने से रोक दिया गया है. वह फिलहाल गुंजी में आईटीबीपी के डॉक्टरों की देखरेख में हैं.

प्रथम दल के 54 यात्री सोमवार की सुबह गुंजी से चलकर नाभीढांग पहुंच गए हैं, जबकि दूसरे दल के 47 सदस्यों ने सोमवार सुबह सिर्खा से गाला तक का पैदल सफर तय किया. प्रथम दल के यात्री मंगलवार सुबह सात बजे से पहले लिपुलेख दर्रा पारकर तिब्बत में प्रवेश करेंगे. तड़के तीन बजे यात्री नाभीढांग से लिपुलेख को रवाना होंगे.

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाला हर अगला दल चार दिन बाद आएगा. तीसरे दल के सदस्य 20 जून को काठगोदाम होते हुए अल्मोड़ा पहुंचेंगे. केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि पड़ावों में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो इसे देखते हुए यह शेड्यूल तय किया गया है. वापसी में भी इसी तरह की व्यवस्था रहेगी.