आपदा में विलुप्त हुए पुराने जलस्रोतों को फिर पुनर्जीवित करेगी केंद्र सरकार

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती का कहना है कि ‘नमामि गंगे’ परियोजना को अथॉरिटी बनाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार भी मिल गया है. उन्होंने कहा कि अब सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट न लगाने वाले होटल और बीच कैंपों पर कार्रवाई की जाएगी. नियमों के उल्लंघन पर इन्हें बंद भी किया जा सकता है. आपदा के दौरान लुप्त हो चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए भी योजना बनाई जा रही है.

मंगलवार को उमा भारती ने ऋषिकेश में केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के चेयरमैन केबी विश्वास, राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी परियोजना के महानिदेशक उपेंद्र प्रसाद सिंह और अधिशासी निदेशक हितेश मखवाना के साथ बैठक की. बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि साल 2013 में आई आपदा के दौरान लुप्त हो चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार योजना तैयार कर रही है.

उमा ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ जलस्रोतों का चयन किया जाएगा। इसका शत-प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी. जबकि शेष प्रोजेक्ट राज्य सरकार के साथ मिलकर पूरे किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि बैठक में आपदा के बाद लुप्त हुए जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर ही चर्चा की गई है. उन्होंने बताया कि इसके लिए केंद्रीय भूमि जल बोर्ड इसरो के साथ मैपिंग कर ऐसे जलस्रोतों की रिपोर्ट तैयार करेगा. साथ ही सूख रही छोटी जलराशियों को भी रिचार्ज करने की भी योजना है.

उमा भारती ने उत्तराखंड के लोगों को गंगा का सच्चा हितैषी बताया और कहा कि राज्य की सीमा में गंगा अब भी निर्मल है. उन्होंने कहा कि बाहर के लोग ही गंगा को दूषित कर रहे हैं. इसके अलावा गंगा तट के शहरों की प्लानिंग सही ढंग से नहीं हुई है, जिससे सीवरेज व दूषित नाले गंगा में मिल रहे हैं. इसके लिए केंद्र सरकार प्लानिंग कर रही है और इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने कहा कि गंगा तट के कुछ शहरों में सीवरेज ट्रीटमेंट व ट्रेंचिंग ग्राउंड की समस्या आड़े आ रही है. इसके लिए मुख्यमंत्री से मिकर समाधान निकाला जाएगा.