नैनी झील के गिरते जल-स्तर को लेकर नैनीताल क्लब में बैठक, मिले अहम सुझाव

नैनीताल में नैनी झील के गिरते जल स्तर को देखते हुए आयुक्त कुमाऊं चन्द्रशेखर भट्ट, अपर निदेशक यूएनडीपी डॉ. राकेश कुमार, जिलाधिकारी दीपेन्द्र कुमार चौधरी तथा बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मंगलवार को नैनीताल क्लब सभागार में बैठक आयोजित हुई. बैठक मे वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों द्वारा नैनीझील संरक्षण एवं सर्वधन हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए. जिस पर डीएम ने कहा कि झील के संरक्षण एवं सर्वधन हेतु जो भी महत्वपूर्ण सुझाव आए हैं उन्हें कार्य योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि नैनी झील का जल स्तर बढ़ सके.

विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि झील के संरक्षण के लिए पूर्व में रुड़की एवं एनआईएस द्वारा स्टडी की गई, उनके भी सुझाव कार्ययोजना में सम्मिलित किए जाएं. साथ ही सूखाताल एरिया की मिट्टी निकालने के बाद कैचमेंट एरिया की बाउंड्री की जाए, ताकि बरसात में वहां इक्ट्ठा पानी नैनी झील को रिचार्ज कर सके. विशेषज्ञों ने कहा कि नैनीताल शहर का पूरा सर्वे किया जाए, पुराने पानी के श्रोतों को बचाने व रिचार्ज करने के लिए सर्व सहमति से योजना बनाई जाए.

विशेषज्ञों ने कहा, बलिया नाले के आस-पास जो नए स्थानों से पानी निकल रहा है, उसकी नवीनतम तकनीक से वैज्ञानिक जांच कराई जाए, ताकि पता लग सके कि यह पानी झील से तो रिसाव नहीं हो रहा है. प्रो. अजय रावत ने कहा कि नैनीताल शहर में निर्माण पर पूर्ण रोक लगाई जाए, साथ ही सुखाताल झील के अन्दर भी निर्माण को रोका जाए. उन्होंने कहा कि नैनी झील संरक्षण हेतु जो भी प्रशासन द्वारा कार्य किए जा रहे हैं वे वैज्ञानिक तरीके से किए जाएं. उन्होंने कहा, नैनीताल में ग्रीनबेल्ट में निर्माण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाए, नैनीताल को इको सेन्सिटिव जोन में विकसित किया जाए, साथ जल नीति भी बनाई जाए.

आयुक्त कुमाऊं चन्द्रशेखर भट्ट ने कहा कि नैनीझील में गिर रहे नालों में कूड़ा व मिटटी डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. अपर निदेशक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि नैनीझील संरक्षण व संर्वधन हेतु पूरा सहयोग दिया जाएगा, साथ ही बुद्धिजीवियों व विशेषज्ञों से समय-समय पर अमूल्य सुझाव लिए जाएंगे.

डीएम चौधरी ने कहा कि जिले में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा आवासीय विद्यालयों, होटलों व अन्य संस्थाओं व बड़े भवनों में इसे अनिवार्य किया जाएगा. उन्होंने जल संस्थान को निर्देश देते हुए कहा कि पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए समय-समय पर मुहिम चलाएं. जिलाधिकारी ने कहा कि बाथरूम व कीचन के वेस्ट पानी का उपयोग किस तरह से किया जा सकता है इसपर भी सोचने की आवश्यकता है.

बैठक में प्रो. अजय रावत, प्रो. जेएल साह, प्रो. डॉ. शेखर पाठक, डॉ प्रो. अरूण कुमार शर्मा, सहित प्रबन्ध निदेशक कुमाऊं मंडल विकास निगम धीराज गर्ब्याल, मुख्य अभियन्ता सिचाई डीसी सिह, वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते अधि. अभि लोनिवि सीएस नेगी, जलसंस्थान जगदीप चौधरी, अभियन्ता झील विकास प्राधिकरण सीएस साह सहित अन्य लोग उपस्थित थे.