सालाना कैलाश-मानसरोवर यात्रा शुरू, जानें इस तीर्थ यात्रा का क्या और क्यों महत्व है

कैलाश-मानसरोवर को शिव-पार्वती का घर माना जाता है. पुराणों के अनुसार इस स्थान को 12 ज्येतिर्लिगों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है. कैलाश बर्फ से आच्छादित 22,028 फुट ऊंचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर को कैलाश-मानसरोवर तीर्थ कहते हैं और इस प्रदेश को मानस खंड कहते हैं.

मानसरोवर झील इलाके में 320 वर्ग किलोमाटर के क्षेत्र में फैली है. इसके उत्तर में कैलाश पर्वत और पश्चिम में राक्षसताल है. यह समुद्रतल से लगभग 4556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

मान्यता है कि मानसरोवर झील सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मन में उत्पन्न हुई थी, इसलिए इसे मानसरोवर कहते हैं क्योंकि ये मानस और सरोवर से मिलकर बनी है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है – मन का सरोवर. यहां देवी सती के शरीर का दायां हाथ गिरा था. इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है.

भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है. भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्र रूप दोनों के लिए विख्यात हैं. शिव ही आदि हैं और शिव ही अंत अर्थात सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं.

शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार. शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं.