इन शातिर रानियों ने अपने दम पर अपने-अपने देशों पर राज किया था

फाइल-फोटो

राजाओं ने ही सत्ता के लिए षडयंत्र नहीं रचा बल्कि कई रानियों ने भी सत्ता हासिल करने के लिए बेहद खतरनाक चाल चली जो आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है. इतिहास में कुछ औरतें ऐसी भी है, जिन्होंने अपने दम पर अपने-अपने देशों पर राज किया था.

1. सुल्तान तुरहान,तुर्की

तुर्की पर दो महिला शासकों का राज रहा एक तुरहान और दूसरी उनकी सास कोसेम. तुरहान से राज्य पर शासक करने के लिए अपनी ही सास कोसेम के खिलाफ षडयंत्र रच कर हत्या कर दी थी. उसकी सास चाहती थी कि वह अपने पोते यानि सुल्तान तुरहान के बेटे महमूद चतुर्थ को मारकर दूसरे पोते को सुल्तान बना दे. इसी कारण तुरहान ने कोसेम को अपने षड्यंत्र का शिकार बना दिया था.

2. सुल्तान कोसेम,तुर्की

कोसेम तुर्की की सबसे शक्तिशाली महिला शासक थी. असल में ग्रीक मूल की कोसेम एक दासी थी. तुर्की के शासक उसकी खूबसूरती के दिवाने हो गए थे और उससे शादी कर ली. जिससे वह तुर्की की मलिका बन गई. कोसेम के पति अहमद प्रथम की मौत के बाद उसने उसके भाई को गद्दी पर बिठा दिया जो मंदबुद्धि था. उसके पीछे राज चलाने वाली औरत कोसेम ही थी.

3. एम्प्रेस वेई,चीन

चीन पर एम्प्रेस वेई के पति झांगजोंग ने 2 बार राज किया. 710 ईस्वी में झांगजोंग की जहर खाने के कारण मौत हो गई थी और गद्दी एम्प्रेस वेई के हाथ में आ गई थी. कहा जाता है कि गद्दी हासिल करने के लिए ही उसने अपने पति को जहर दी थी और राज गद्दी हासिल करने के कुछ दिनों बाद ही झांगजोंग के भतीजे ली लोंगजी ने एम्प्रेस वेई की हत्या करवा दी. इसके बाद वह खुद राज करने लगा.

4. रानी आर्सिनोए मिस्र

मूल रूप से एक ग्रीक प्रिंसेस आर्सिनोए द्वितीय ने प्राचीन मिस्त्र पर राज किया था. आर्सिनोए के पहले पति का नाम किंग लिसीमेकस था जिस कारण उसने थ्रास, एशिया माइनर और मेसिडोनिया पर राज किया. बाद में किंग लिसीमेकस ने आर्सिनोए की शादी अपने ही भाई टॉलेमी द्वितीय फिलाडेल्फस से करवा दी और वह मिस्त्र की शासक बन गई.

5. मिस्र की रानी एहोतेप प्रथम
ईसा पूर्व 1530 से 1560 में अपने जीवन काल में क्वीन तेतीशेरी और फराओ शेनाख्तेरने की बेटी एहोतेफ प्रथम मिस्र की रानी थी. इन्होंने फराओ सेक्वेनेनरे पाओ से शादी की ली. कहा जाता है कि ये दोनों एक-दूसरे के भाई-बहन भी थे.

6. मलिका ए हिंदुस्तान नूरजहां
नूरजहां जहांगीर की पत्नी थी. लेकिन कहते हैं कि जहांगीर के शासनकाल में नूरजहां का हीं राज चलता था. सारे फैसले नूरजहां ही लेती थी. और यहां तक कि शाही फरमान भी इनके नाम से ही जारी होते थे. इतना ही नहीं शाही मुहर भी नूरजहां के पास ही होती था.