इस साल भारत में जरूरत से ज्यादा बिजली होगी पैदा, अन्य देशों को कर सकते हैं निर्यात

भारत चालू वित्त वर्ष में अधिशेष बिजली वाला देश बन सकता है. अप्रैल में बिजली की किल्लत और व्यस्त समय में बिजली की कमी एक प्रतिशत से कम रही है. कई राज्यों में बिजली की कमी शून्य रही. भारत ऐसी स्थिति में पहुंच सकता है कि वह पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात कर सकता है.

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की अप्रैल महीने के लिए ताजा मासिक रिपोर्ट के अनुसार देश में उर्जा की कमी आलोच्य महीने में 0.5 प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी माह में 1.4 प्रतिशत थी.

पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्र में अप्रैल में उर्जा की कमी महज 0.1 प्रतिशत रही. हालांकि पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऊर्जा की कमी 4.5 प्रतिशत जबकि उत्तरी क्षेत्र में यह 1.5 प्रतिशत थी.

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अप्रैल में देश में व्यस्त समय में बिजली की कमी घटकर 0.8 प्रतिशत पर आ गयी. दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में यह 0.1-0.1 प्रतिशत रही.

हालांकि पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यस्त समय में बिजली की कमी अप्रैल में 2.2 प्रतिशत रही. वहीं उत्तरी क्षेत्र में यह 1.8 प्रतिशत थी. बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कई राज्यों ने इस वर्ष अप्रैल में उर्जा की कमी तथा व्यस्त समय में बिजली की कमी शून्य होने की रिपोर्ट दी है.

इन राज्यों में छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओड़िशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा तथा पश्चिम बंगाल शामिल हैं. जिन राज्यों में ऊर्जा की कमी (ईएस) और व्यस्त समय में बिजली की किल्लत (पीपीपी) एक प्रतिशत तक रही है, वे आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश (पीपीडी शून्य), झारखंड (पीपीडी शून्य) महाराष्ट्र, मेघालय (ईएस शून्य) पुडुचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना (ईएस शून्य) तथा उत्तराखंड (पीपीडी शून्य) शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश में अप्रैल में ऊर्जा की कमी अप्रैल में एक प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी महीने में यह 14 प्रतिशत थी. इसके अलावा व्यस्त समय में बिजली की कमी शून्य रही.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘अखिल भारतीय बिजली आपूर्ति यह संकेत देती है कि देश में व्यस्त समय में बिजली अधिशेष 6.8 प्रतिशत तथा ऊर्जा अधिशेष 8.8 प्रतिशत होने की उम्मीद है.’