एनएच-74 घोटाले और मंहगाई को लेकर कांग्रेस ने किया विरोध प्रदर्शन

एनएच 74 घोटाला

एनएच-74 घोटाले की जांच में लीपापोती किए जाने तथा आम आदमी पर महंगाई का बोझ डालने का आरोप लगाते हुए विपक्षी कांग्रेस ने मंगलवार को उत्तराखंड में सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करते हुए केंद्र तथा राज्य सरकार का पुतला फूंका तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा.

अस्थायी राजधानी देहरादून में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया और उसके बाद देहरादून के उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया.

इससे पहले, कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने उत्तराखंड की बीजेपी सरकार पर अपने दो माह के कार्यकाल में कई जन विरोधी निर्णय लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का दावा करने वाली उत्तराखंड सरकार द्वारा एनएच-74 घोटाले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश को अब तक केंद्र सरकार की अनुमति नहीं मिल पायी है.

प्रीतम सिंह ने कहा, ‘लोकतंत्र के इतिहास में यह पहला अवसर है जब राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच के अनुरोध के बावजूद संबंधित विभाग के केंद्रीय मंत्री अधिकारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपना फैसला वापस लेने का दवाब बना रहे हैं.’ उन्होंने आरोप लगाया कि इससे साफ है कि केंद्र सरकार कथित एनएच-74 घोटाले के दोषियों को बचाना चाहती है.

प्रीतम ने यह भी कहा कि एनएच-74 घोटाला सामने आते ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था और उसने अपना कार्य शुरू भी कर दिया था, लेकिन बीजेपी की सरकार मामले को उजागर करने वाले अधिकारी का ही तबादला कर मामले में लीपापोती करने का प्रयास कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार को भी यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसा कौन सा दबाव है, जिसके चलते वह सीबीआई जांच से कतरा रही है.’ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर भी कहा कि बिजली, पानी और सीवर टैक्स के दाम बढ़ाकर राज्य सरकार ने पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता की कमर और तोड़ दी है.

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस के शासनकाल में जनता को मिल रहे गेहूं और चावल के दामों को दोगुना कर गरीब आदमी के पेट पर लात मारने का काम किया है. प्रीतम सिंह ने राज्य सरकार को आबकारी नीति पर भी घेरा और कहा कि महिलाओं के आंदोलन के बावजूद माफिया और तस्करी को बल देने वाली नीति को लागू किया गया है.