गुजरात बोर्ड के टॉपर ने लिया जैन भिक्षु बनने का फैसला | माता-पिता ने भी दिया साथ

गुजरात, 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 99.9 फीसदी अंक पाने वाले किसी भी विद्यार्थी का सपना टॉप कॉलेज में प्रवेश लेकर बेहतर करियर चुनना रहता है. लेकिन गुजरात बोर्ड के टॉपर वार्शिल शाह ने कुछ और ही राह चुनी है. ऐसे में अपने माता-पिता से अपनी इस मेहनत का इनाम मांगने की बजाए वर्शील ने संसार का त्याग कर जैन संन्यासी बनने की इजाजत मांगी. हैरानी की बात यह है कि वर्शील के माता-पिता को भी अपने बेटे के इस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है और पूरा परिवार वर्शील के दीक्षा समारोह की तैयारियों में जुटा है जो 8 जून गुरुवार को सूरत में होगा।

वर्शील के पिता जिगर शाह कहते हैं कि उनका परिवार शुरू से ही आध्यात्म की तरफ अधिक झुकाव रहा. जिगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत है. जिगर कहते हैं, ‘मेरी पत्नी अमी बहुत ज्यादा धार्मिक स्वभाव की है और मेरे बच्चे वर्शील और उसकी बहन का भी धर्म और अध्यात्म की तरफ झुकाव है. वास्तव में जब वर्शील की स्कूल की छुट्टियां होती थीं तो कहीं घूमने जाने की बजाए वह सत्संग में जाना पसंद करता था.इन सत्संगों के दौरान ही वर्शील कई जैन मुनियों और संन्यासियों के संपर्क में आया जो संन्यासी बनने से पहले डॉक्टर, इंजिनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट थे लेकिन असली खुशी उन्हें दीक्षा लेने के बाद ही मिली.

वर्शील के पिता कहते हैं, ‘मेरे बेटे ने बहुत मेहनत कर 12वीं की परीक्षा की तैयारी सिर्फ इसलिए की थी क्योंकि मैं ऐसा चाहता था.’ इतने अच्छे नंबर लाने के बावजूद वर्शील ने अब तक स्कूल से अपनी मार्कशीट नहीं ली है. शाह दंपती बेहद साधारण जीवन जीते हैं और आज के जमाने में भी उनके घर में बहुत ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेज भी नहीं है. वर्शील के माता-पिता अपने बेटे के फैसले से थोड़े उदास जरूर हैं कि लेकिन उसकी इच्छा का समर्थन कर खुश भी है. जिगर शाह कहते हैं, ‘हम उदास थे क्योंकि हमने उसके भविष्य को लेकर कई सपने देखे थे. लेकिन वर्शील ने कभी हमसे कुछ नहीं मांगा. इसलिए पहली बार जब उसने कुछ मांगा संसार का त्याग करने की उसकी इच्छा तो हमने उसे भी मान लिया। दीक्षा से वर्शील को खुशी मिलेगी और उसे खुश देखकर हम भी खुश रहेंगे.