बुलंद हौसले को सलाम: 97 वर्ष की उम्र में दी एमए की परीक्षा

पटना, दिल में कुछ कर गुजरने की जज्बा हो तो मंजिल मिल ही जाती है. जी हां हम बात कर रहे है उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके राजकुमार वैश्य की. वह आजकल नालंदा ओपन विश्वविद्यालय (एनओयू) से एमए की परीक्षा देकर मीडिया की सुर्खियों में है. राजकुमार नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के पहले ऐसे परीक्षार्थी हैं जो 97 वर्ष की उम्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा में शामिल हुए हैं. उन्होंने मंगलवार को पहली पाली में अर्थशास्त्र प्रथम वर्ष की परीक्षा केंद्र पर जाकर दी और 3 घंटे सवालों से जूझते रहे.

उत्तर प्रदेश के बरेली जिला निवासी राजकुमार ने 1934 में बरेली से मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से पास की थी. इसके बाद 1938 में बीए और बैचलर ऑफ लॉ की परीक्षा पास की. इस उम्र में परीक्षा देने का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि मेरा कदम उन युवाओं के लिए है जो किसी कारण से पढ़ाई से दूर हो चुके हैं. ऐसे लोगों को सरकार जब ताउम्र पढऩे की सुविधा दे रही है तो उसका लाभ लेने में क्या हर्ज है. बता दें कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती यह राजकुमार वैश्य ने साबित कर दिया. जो ये सोचते है कि पढ़ने लिखने की उम्र सीमित होती है तो इनके लिए राजकुमार वैश्य एक मिशाल हैं.

राजकुमार वैश्य 97 बसंत देखने के बाद भी अपने बुलंद हौसलों से सफलता की इबारत लिख रहे हैं. शिक्षा तो आभूषण है जिससे इंसान के अंदर आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निखरता है। शिक्षा ही ऐसी चीज है जो जीवन की कठिन चुनौतियों को हल करने में सहायक होती है और जीवन में बहुत से उद्देश्यों को प्रदान करती है जिससे व्यक्तिगत उन्नति को बढ़ावा मिलने के साथी ही सामाजिक स्तर में बढ़ावा मिलता है.