शिशु मंदिर और सरकारी स्कूल से पढ़ा चमोली के दूरस्त गांव का बेटा बना IAS

बुधवार 31 मई को घोष‌ित हुए यूपीएससी र‌िजल्ट में उत्तराखंड में दूरस्त गांव के एक बेटे ने भी कमाल कर द‌िखाया है. उत्तराखंड में चमोली जिले के दूरस्थ गांव कोठली का बेटा हेमंत सती सिविल सर्विस परीक्षा पास कर आईएएस बन गया है.

परीक्षा में हेमंत ने देशभर में 88वां स्थान हासिल किया है. उनका सपना उत्तराखंड से पलायन रोकना, आपदा प्रबंधन और जल संकट से निपटने के लिए ब्यूरोक्रेसी को और मजबूत करना है.

हेमंत ने प्राइमरी तक की पढ़ाई चौखुटिया, अल्मोड़ा के सरस्वती शिशु मंदिर से की. वे रोजाना तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे. इसके बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज चौखुटिया से 12वीं पास की. इसके बाद देहरादून के डीबीएस पीजी कॉलेज से बीएससी पीसीएम किया.

हेमंत का सपना आईएएस बनना था. इसलिए बीएससी के बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया. इसके बाद वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए. हेमंत ने 2013 की राजस्थान पीसीएस परीक्षा पास की है, जिसका परिणाम हाल ही में आया है.

हेमंत के पिता कांता प्रकाश सती राजकीय इंटर कॉलेज हर्बटपुर में शिक्षक हैं, जबकि मां सतेश्वरी देवी गृहिणी हैं. उनका छोटा भाई भी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा है. हेमंत ने बताया कि उन्होंने सुविधाओं से पिछड़े उत्तराखंड को आगे बढ़ाने के लिए सिविल सेवा का रास्ता चुना है. उन्होंने हाल ही में उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा का इंटरव्यू भी दिया है, जिसका रिजल्ट आना बाकी है.

हमेशा सकारात्मक रहने वाले हेमंत सती को पांचवें प्रयास में यह सफलता मिली है. हेमंत ने बताया कि इससे पहले वह तीन बार सिविल सेवा मुख्य परीक्षा से बाहर हुए हैं, जबकि एक बार इंटरव्यू दे चुके हैं. पांचवें प्रयास में उन्हें सफलता हासिल हुई.

हेमंत ने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में उनसे उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे गए. इसके अलावा राज्य की जल समस्या को दूर करने और पलायन रोकने के बारे में भी सवाल पूछा गया. किसानों की कर्ज माफी को लेकर भी उनसे सवाल पूछा गया और इसके बारे में यह भी पूछा गया कि यह कहां तक सही है.

हेमंत सती ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी एक साथ की. उनका कहना है कि उन्होंने कभी प्री और मेंस के हिसाब से तैयारी के बजाए सीधे पूरी प्रक्रिया की तैयारी की है. यह उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुई. उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बताया है कि वह प्री, मेंस और इंटरव्यू की एक साथ तैयारी करें. एक ही सिलेबस से प्री, मेंस और इंटरव्यू के सवाल बना लें तो निश्चित तौर पर आसानी होगी. इसके अलावा उन्होंने प्रयाग आईएएस एकेडमी से सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग की.

हेमंत का कहना है कि वह अपने कैडर में उत्तराखंड को ही चुनेंगे. यहां ब्यूरोक्रेसी में कई बदलाव की जरूरत है. हेमंत ने बताया कि वह हाल ही में अपने गांव से लौटे हैं, जहां न तो बिजली है और न ही इंटरनेट की सुविधा. लगा जैसे दूसरी दुनिया से लौटा हूं. आज तक अगर वहां कनेक्टिविटी नहीं पहुंची है तो यह हमारे सिस्टम की विफलता है.

राज्य में तेजी से पलायन हो रहा है, जिसका जिम्मेदार हमारा एजुकेशन सिस्टम और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है. अगर हम पहाड़ में ही सभी सुविधाएं देंगे तो निश्चित तौर पर पलायन पर लगाम लगेगी. राज्य में ब्यूरोक्रेसी की जिस तरह सुस्ती है, उस हिसाब से पहाड़ का सीना छलनी किया जा रहा है. आपदा को हम खुद बढ़ावा दे रहे हैं. लिहाजा, ब्यूरोक्रेसी की इस सुस्ती को दूर करने की जरूरत है.