नासा का सूर्य छूने का मिशन 2018 में होगा शुरू

अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा अब एक और कामयाबी हासिल करने की तरफ कदम बढ़ा रही है. सोलर प्रोब प्लस नाम के इस अभियान के जरिए नासा शोध यान भेजकर सूर्य के वातावरण और उसकी संरचना का अध्ययन करेगी. सूर्य के वातावरण में जाने वाला दुनिया का यह पहला शोध यान अगले साल अगस्त में अपना सफर शुरू करेगा. सूर्य के अनसुलझे रहस्यों को जानने के लिए सोलर प्रोब प्लस का नाम शिकागो विश्वविद्यालय के एस्ट्रोफिजिस्ट यूजेन पार्कर के नाम पर इस मिशन का नाम रखा गया है.

जुलाई 2018 में केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरने के बाद पार्कर सोलर प्रोब दुनिया का सबसे पहला शोधयान होगा जो कोरोना पर कदम रखेगा. सूर्य के तापमान का सामना करने के लिए 4.5 इंच मोदी कार्बन कंपोजिट की दीवार बनाई गई है. जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की निकोला फॉक्स के मुताबिक शोधयान के जरिए सूरज से निकलने वाली प्लाज्मा तरंगों और हाइ एनर्जी पार्टिकल्स का अध्ययन किया जाएगा.

परियोजना की लागत 1.54 अरब डॉलर
शोध यान का वजन 610 किलोग्राम
सूर्य मिशन पर सोलर प्रोब प्लस
1400 डिग्री से. सूर्य का तापमान
2018 में मिशन होगा शुरू
शोध यान का वजन 610 किलोग्राम है. और यह 1370 डिग्री से. तापमान का बर्दाश्त करने में सक्षम है. यह सूर्य से निकलने वाले विकिरणों और तरंगों का सामना कर सकता है.शोधयान को सूर्य की सतह से 40 लाख मील की दूरी के अंदर ही स्थापित किया जाएगा. सूर्य को घेरने वाले इस हिस्से को कोरोना के नाम से भी जाना जाता है।यह सूर्य का बाहरी वातावरण भी है.

शोध यान सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन कर यह पता लगाएगा कि आखिर यह काम कैसे करता है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इसके वातावरण में होने वाले बदलावों का धरती और अंतरिक्ष पर क्या असर पड़ता है.सूर्य के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए 1974 और 1976 में नासा ने हीलियोज-1 और हीलियोज-2 नाम के शोधयान भेजे थे. इन्हें हीलियोसेंट्रिंक ऑर्बिट में स्थापिक किया गया था. हमारी आकाशगंगा की यह वो ऑर्बिट है जो सूर्य के सबसे करीब गुजरती है.