आज से शुरू हुआ मासी का प्रसिद्ध एतिहासिक सोमनाथ मेला

चौखुटिया, भूमियां देवता को स्थानीय देव के रूप में अटूट श्रद्धा व विश्वास के साथ देवभूमि उत्तराखंड में  पूजा जाता है. इन्हें छत्रपाल के नाम से भी पुकारा जाता है. यहां स्थान-स्थान पर इस देवता के मंदिर हैं. कहीं-कहीं तो भूमियां के भव्य मंदिर बनाए गए हैं.

इन्हीं में एक है मासी श्रीभूमियां देवता का मंदिर. मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु मन्नतें लेकर इस देवता के शरण में पहुंचता है. उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है. मासी का भूमियां देवता मंदिर प्राचीन काल से ही लोगों की अटूट श्रद्धा व विश्वास का केंद्र रहा है. आसपास से ही नहीं वरन दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. शादी-ब्याह के सीजन में तो यहां काफी चहल-पहल रहती है.

मंदिर में विशेष रूप से मंगल व शनिवार को पूजा-पाठ की परंपरा चली आ रही है. मन्नत पूर्ण होने पर श्रद्धालु मंदिर में घंटियां चढ़ाते हैं एवं देव को भोग लगाकर प्रसाद वितरण करते हैं. बधाई पूजन का यहां विशेष महत्व है तथा बहू-बेटियां भूमियां की समर्पित भाव से पूजा करते हैं. मासी भूमियां देवता की मान्यता इसलिए है कि इसका कार्य क्षेत्र या रक्षा क्षेत्र कई गांवों के सरहद को पार कर बना है.पूर्व में यहां पर एक छोटा सा मंदिर था. जिसे अब भव्य रूप दे दिया गया है. मंदिर परिसर में भगवान राम समेत कई अन्य देवताओं के मंदिर भी हैं.

मंदिर विकास समिति के तत्वावधान में बीते कई वर्षो से मंदिर परिसर में भूमियां देवता वार्षिक दिवस समारोह मनाया जा रहा है. इस वर्ष भी समारोह छह मई से भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हो रहा है. जो दो दिन तक चलेगा .बार भूमियां देवता की नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापना होगी। समारोह की सभी तैयारी पूर्ण कर ली गई हैं. समापन दूसरे दिन भंडारे के साथ होगा.

मासी का प्रसिद्ध एतिहासिक सोमनाथ मेला सात मई से शुरू हो रहा है. मेले की तैयारियां आखिरी चरण में हैं. मेला समिति की बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई एवं कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया गया. तय हुआ कि मेला सात दिन तक चलेगा एवं प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी. मेले की परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए लोगों से गांवों से अधिक से नगाड़े-निशानों के साथ पहुंचने की अपील की गई.