उत्तराखंड में मौजूद है देश का यह एकमात्र मंदिर, जहां देवी के नौ रूपों की पूजा होती है

देशभर में चैत्र नवरात्रों की धूम है और नवरात्रों को लेकर देवभूमि के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ जुट रही है. मां भगवती के मंदिरों में हवन-पूजन चल रहा है. मां दुर्गा के प‌वित्र उत्सव में देवी के नौ रूपों की एक साथ पूजा होती है.

पहली नवरात्र को जोशीमठ क्षेत्र में स्थित मां दुर्गा के मंदिर में नवरात्रा पाठ का आयोजन किया गया. यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा एक स्थान पर संपन्न होती है.

यहां मंदिर के गर्भगृह में पाषाण कालीन मां दुर्गा की नौ प्रतिमाएं हैं. नवरात्र आयोजन के लिए क्षेत्र की ध्याणियां भी अपने मायके पहुंच गई हैं.

जोशीमठ में नृसिंह मंदिर परिसर में ही मां दुर्गा मंदिर भी स्थित है. मंदिर में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की प्रतिमा स्थापित है.

मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल में पांडवों की ओर से बनाया गया था. आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने भारतवर्ष में पूर्णागिरी पीठ की स्थापना की थी, जिनमें से एक जोशीमठ का नव दुर्गा मंदिर भी शामिल है. इस मंदिर का जीर्णोंद्धार 11वीं शताब्दी में कत्यूरी राजा ने किया था.

मंदिर के पुजारी रघुनंदन डिमरी के अनुसार, नव दुर्गा मंदिर में मक्खन का विशेष महत्व है. श्रद्धालु मां दुर्गा की प्रतिमाओं को मक्खन का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि मां दुर्गा को मक्खन का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं. चार धाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्री मां दुर्गा के मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूलते. पंडित रघुनंदन ने बताया कि अष्टमी के दिन दुर्गा मंदिर में विशेष पूजा होगी.