तमाम मिथक दरकिनार, त्रिवेंद्र रावत ने किया मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र स‌िंह रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तमाम डर और आशंकाओं से पार पाते हुए बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश कर लिया है. लेक‌िन यह भी सच है कि इस आवास के साथ जो रहस्य जुड़ा है उससे उत्तराखंड के पूर्व में रहे सभी सीएम भी डरते थे.

उत्तराखंड के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को कैंट रोड स्थित उस मुख्यमंत्री आवास में विधि-विधान से गृह प्रवेश किया, जिसे इस लिहाज से अभिशप्त बताया जाता है कि इस बंगले में जो मुख्यमंत्री रहा, वह सत्ता से ही बेदखल हो गया.

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तो इस बंगले में कभी रहे ही नहीं. बहरहाल अब देखना यह है कि त्रिवेंद्र इस बंगले के साथ जुड़े कथित अभिशाप के शिकार होते हैं या इसे तोड़ पाने में कामयाब होते हैं. कहा जा रहा है कि सीएम प्रवेश से पहले कई ज्योतिष और पंडितों से रायशुमारी के बाद ही इस बंगले में आए हैं. कैंट में राजभवन से लगा हुआ मुख्यमंत्री आवास अपनी खूबसूरती के लिए इतना मशहूर नहीं है, जितना सियासी हल्कों में अपनी बदनामी के लिए जाना जाता है.

इसके बारे में यहां तक कहा जाता है कि इसके निर्माण के बाद ही नहीं निर्माण के दौरान ही मुख्यमंत्रियों की कुर्सियां खिसकती रही हैं. यह सिलसिला उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार से शुरू हुआ. उनके वक्त में यह बंगला निर्माणाधीन था. इससे पहले कि तिवारी यहां रहने आते, उनकी सरकार की चली गई.

तिवारी सरकार के बाद उत्तराखंड में आई बीजेपी की सत्ता में मुख्यमंत्री बने बीसी खंडूड़ी ने इस अधूरे बंगले को अपनी पसंद के हिसाब से तैयार करवाया. मगर, खंडूड़ी जब इस बंगले में रहने के लिए पहुंचे तो लगभग ढाई साल में ही उनकी कुर्सी खिसक कर डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के पास आ गई.

निशंक भी इसी बंगले से अपनी सत्ता चलाने लगे, लेकिन सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के लगभग छह महीने पूर्व ही निशंक भी तमाम आरोपों के चलते इस कुर्सी से बेदखल हो गए. उनके बाद सत्ता दोबारा बीसी खंडूड़ी के हाथ आई, मगर चुनाव में सरकार ही बदल गई. कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री पद पर अपनी ताजपोशी करवाने के बाद विजय बहुगुणा भी इसी आवास में रहने लगे, लेकिन दो सालों में तमाम आरोपों के दाग लेकर विजय बहुगुणा भी मुख्यमंत्री पद से अपदस्थ हो गए.

त्रिवेंद्र रावत ने कैंट रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में बुधवार सुबह 11 बजे गृह प्रवेश किया. इस मौके पर त्रिवेंद्र सरकार के कई कैबिनेट मंत्री भी मौजूद रहे. विधि-विधान के साथ हुए पूजापाठ के बाद मुख्यमंत्री के परिवार ने बंगले में प्रवेश किया. कहा तो यह भी जा रहा है कि सीएम ने प्रवेश से पहले कई ज्योतिष, वास्तु शास्त्रियों और पंडितों से बंगले को लेकर रायशुमारी की.

कुछ फेरबदल भी उनके बताने के बाद किए गए. इसके बाद ही त्रिवेंद्र इस बंगले में आए हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश पर मीडिया के भीतर प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई. वहीं शासन के आला अफसरों के लिए यहां दोपहर का भोजन आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के अलावा तमाम प्रमुख लोग मौजूद रहे. मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले अपर मुख्य सचिव ओम प्रकार की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं होती रहीं. लोग इसे लेकर कयास भी लगाते रहे.

उत्तराखंड में पिछली सरकारों में बने मुख्यमंत्री मिथकों से खौफ खाते रहे हैं. इसी वजह से देहरादून में न्यू कैंट रोड स्थित 27 करोड़ की लागत से बना बंगला हरीश रावत के शासनकाल में खाली रहा. इस बंगले को लेकर यह मिथक बना हुआ है कि जो भी मुख्यमंत्री इस बंगले में गया वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया.

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में तो मुख्यमंत्री के करोड़ों की लागत से बने इस बंगले के साथ ही सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय का एक कक्ष भी मिथको से जुड़ा रहा है. 420 नंबर के इस कमरे को अशुभ मानते हुए इस कक्ष के बाहर न तो नंबर लिखा हुआ है न ही इस कक्ष में कोई अधिकारी बैठा.

खैर, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के प्रवेश से वीरान पड़ा सीएम का बंगला एक बार फिर गुलजार हो गया है.