चैत्र नवरात्र : पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, ये है घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्र पूजन के पहले दिन कलश पूजा के साथ मां शैलपुत्री जी का पूजन किया जाता है. चैत्र नवरात्र मंगलवार 28 मार्च से शुरू हो रहे हैं और 05 अप्रैल को खत्म होंगे. शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है. मां शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए हुए हैं. इनका वाहन वृषभ है. नवदुर्गाओं में मां शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनन्त हैं.

28 मार्च 2017: घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 8.26 बजे से लेकर 10.24 बजे तक का है.

पहले दिन ऐसे करें पूजा
नवरात्र के प्रथम दिन स्नान-ध्यान करके माता दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ कलश स्थापन करें. कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें. कलश स्थापन के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आंगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें. संभव हो, तो नदी की रेत रखें. फिर जौ भी डालें. इसके उपरांत कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें. फिर ‘ॐ भूम्यै नमः’ कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें. अब कलश में थोड़ा और जल या गंगाजल डालते हुए ‘ॐ वरुणाय नमः’ कहें और जल से भर दें. इसके बाद आम का पल्लव कलश के ऊपर रखें. तत्पश्चात् जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें. अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें. हाथ में हल्दी, अक्षत पुष्प लेकर इच्छित संकल्प लें. इसके बाद ‘ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः! दीपो हरतु मे पापं पूजा दीप नमोस्तु ते। मंत्र का जाप करते दीप पूजन करें.

कलश पूजन के बाद नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे!’ से सभी पूजन सामग्री अर्पण करते हुए मां शैलपुत्री की पूजा करें. मनोविकारों से बचने के लिए मां शैलपुत्री को सफेद कनेर का फूल भी चढ़ा सकती हैं. मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अथवा वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्। मंत्र का जाप करें.

आगमन व गमन
चैत्र नवरात्र 2017 में मां दुर्गा का आगमन नाव से होगा व गमन हाथी पर होगा. यह अति शुभ है. देवी पुराण में नवरात्र में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताए गए हैं.

इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है. दुर्गा जी मंगलवार को नाव पर सवार होकर आएंगी एवं विसर्जन होने पर हाथी पर बैठकर जाएंगी.

देवी पुराण के अनुसार: आगमन के लिए वाहन- रविवार व सोमवार को हाथी, शनिवार व मंगलवार को घोड़ा, गुरुवार व शुक्रवार को पालकी, बुधवार को नौका आगमन होता है.

आइए जानें नवरात्रि में कैसे मां को प्रसन्न करके अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते है. यही एक ऐसा पर्व है जिसमे महाकाली, मां सरस्वती, और मां लक्ष्मी की साधना करके आप अपनी इच्छा पूर्ति कर सकते हो. इस बार 28 मार्च से शुरू होने वाले इस पवन पर्व पर आप इस तरह पूजा करके मां को खुश कर सकते है.

नवरात्रि में पूजा विधि

  • इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें.
  • ज्यादा से ज्यादा नर्वाण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै का जप अवश्य करें.
  • इन नौ दिनों में व्रत जरूर रखें. यदि सारे नहीं रख सकते तो पहला, चौथा और आखिरी दिन का उपवास जरूर करें.
  • भूलकर भी तुलसी का पत्ता या दुर्बा घास न चढ़ाएं. यह इन दिनों में निषिद्ध माना गया है.
  • यदि हो सके तो पूजा के समय लाल वस्त्र धारण करें. लाल रंग का तिलक जरूर लगाए. लाल रंग आपको एक विशेष ऊर्जा प्रदान करता है.
  • नौ दिनों तक मां दुर्गा के नाम की ज्योति अवश्य जलाएं.
  • मां को प्रात: काल के समय शहद मिला दूध चढ़ाएं. पूजा के पश्चात् इस दूध को पीने से शरीर में ऊर्जा और मन को शांति मिलती है.
  • आखिरी दिन घर में रखी पुस्तकें, कलम, वाद्य यन्त्र की पूजा जरूर करें.
  • अष्टमी या नवमी जो भी आपके घर होती है. उस दिन कन्याओं का पूजन करके उन्हें भोजन करवाएं. उसके बाद ही भोजन प्राप्त करें.