सत्ता हाथ से गई तो कांग्रेस को गैरसैंण की याद आयी, अब कांग्रेस के ढर्रे पर बीजेपी

गैरसैंण विधानसभा

साल 2012 से 2017 तक पांच साल सत्ता में रहते हुए गैरसैंण पर अनिर्णय की स्थिति में रही कांग्रेस ने विपक्ष में आते ही अब इसे स्थायी राजधानी बनाने का राग छेड़ दिया है. वह गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बीजेपी की कोशिशों से बेहद क्षुब्ध और हमलावर है. मगर तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि कांग्रेस खुद अपनी सरकार में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के तौर पर ही विकसित कर रही थी.

इसका सबसे बड़ा प्रमाण राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का वह अभिभाषण है जो उन्होंने 18 मई 2015 को विधानसभा में दिया था. उस वक्त राज्य में कांग्रेस की ही सरकार थी और विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर गोविंद सिंह कुंजवाल विराजमान थे. लेकिन आज बदली हुई परिस्थितियों में कांग्रेस में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की कोशिशों के खिलाफ यदि कोई सबसे ज्यादा मुखर है तो वह कुंजवाल ही हैं.

बकौल कुंजवाल, वह हमेशा से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने के पक्ष में रहे. मगर उनकी सरकार ने राजधानी बनाने की घोषणा क्यों नहीं की, इस सवाल का उनके पास कोई सही-सही जवाब नहीं है. अलबत्ता वह शायद भूल गए कि जिस सदन की वह रहनुमाई करते थे, उसी सदन में उनकी सरकार के बुलावे पर उत्तराखंड आए राष्ट्रपति ने जो अभिभाषण दिया. उसमें भी गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का जिक्र हुआ.

अभिभाषण के पेज नंबर तीन के दूसरे पैराग्राफ में राष्ट्रपति ने कहा था, ‘मुझे यह जानकार खुशी हो रही है कि यह राज्य चमोली जिले में स्थित गैरसैंण को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाना चाहता है, तथा नए विधानसभा भवन का निर्माण कार्य आरंभ हो चुका है.’ गौर करने वाली बात यह है कि अभिभाषण के कथन में राज्य का आशय यदि प्रजा से है तो फिर भाजपा वही कर रही है जो जनता चाह रही है.

यदि इसका आशय तत्कालीन सरकार से था तो सवाल है कि अभिभाषण में ग्रीष्मकालीन राजधानी का आशय क्या था? इसके बाद तत्कालीन सरकार ने गैरसैंण में विधानसभा भवन, विधायक आवास और अफसर कॉलोनी बनाने की दिशा में युद्धस्तर पर प्रयास किए. उसकी इस तेजी को देखकर यही उम्मीद की जा रही थी कि वह गैरसैंण पर कोई निर्णय लेगी. मगर वह अपने चुनाव घोषणा पत्र तक में राजधानी का जिक्र करने से बची. वह सिर्फ यही कहती रही कि वह संसाधनों का विस्तार करके जनाकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रही है. मगर सत्ता से बेदखल होने के साथ गैरसैंण का मुद्दा मुट्ठी से रेत की तरह निकल गया.

राजधानी पर भाजपा सरकार का स्टैंड भी स्पष्ट नहीं है. हालांकि शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण में उसने इस मुद्दे का उल्लेख सबसे आखिर में किया है. मगर वह गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात खुलकर नहीं कर रही है. वह कह रही है कि वह सहमति से निर्णय लेगी.

कांग्रेस की राय तो जाहिर हो ही चुकी है. क्षेत्रीय दल यूकेडी भी गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की वकालत कर रहा है. ऐसे में प्रश्न यही है कि आम सहमति नहीं बनी तो क्या गैरसैंण पर निर्णय नहीं होगा?