ब्रिटिश संसद में हुए हमले में 7 संदिग्ध हिरासत में

लंदन।… ब्रिटेन में संसद के बाहर बुधवार को हुए हमले के सिलसिले में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस घटना में मरने वालों की संख्या चार बताई गई है. इनमें हमलावर भी शामिल है. मरने वालों में एक पुलिसकर्मी तथा दो आम नागरिक हैं. इससे पहले आई रिपोर्ट में मरने वालों की संख्या पांच बताई गई थी.

पुलिस के अनुसार, हमले में घायल होने वाले सात लोग अब भी अस्पताल में हैं और उनकी हालत गंभीर है, जबकि 29 अन्य को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई

कार्यवाहक उपायुक्त व आतंकवाद रोधी इकाई के प्रमुख मार्क रॉवले ने बताया कि हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों में एक महिला और एक पुरुष हैं। महिला की उम्र 40-49 के बीच बताई जा रही है, जबकि पुरुष की उम्र 50-59 के बीच है. हमले में जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारी का नाम कीथ पामर (48) बताया गया है. उन्होंने 15 साल तक पुलिस को सेवा दी.

इससे पहले विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या हमलावर सहित पांच बताई गई थी. हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों की संख्या तीन बताई गई थी

यह हमला बुधवार को ब्रसेल्स हमले की पहली बरसी (22 मार्च) पर किया गया. वारदात को एक ही हमलावर ने अंजाम दिया. हमला स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 2.30 बजे (भारतीय समयानुसार रात करीब आठ बजे) किया गया.

कार सवार हमलावर ने पहले टेम्स नदी पर बने वेस्टमिंस्टर ब्रिज पर पैदल चल रहे कई लोगों को कुचल दिया. इस क्रम में कुछ लोग नदी में जा गिरे. वह सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए संसद की ओर बढ़ा। उसके हाथ में बड़ा चाकू था. पुलिस ने उसे रोका, जिस पर उसने निहत्थे पुलिसकर्मी कीथ को चाकू मार दिया। इसके बाद वहां तैनात अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उसे मार गिराया.

‘बीबीसी’ के अनुसार, रॉवले ने बताया कि पूरी रात सैकड़ों खुफियाकर्मी काम रहते रहे। उन्होंने छह ठिकानों पर छापेमारी की। लंदन, बर्मिघम तथा देश के अन्य हिस्सों में भी जांच की गई।

उन्होंने कहा, “हमें अब भी यकीन है कि हमलावर अकेला था। वह अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद..इस्लामिक आतंकवाद से प्रेरित था.”

पुलिस ने फिलहाल हमलावर की पहचान का खुलासा नहीं किया है. लेकिन, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर ’35-40 साल का एशियाई’ व्यक्ति था.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने हमले को ‘बीमार और विकृत मानसिकता’ का परिचायक बताया.उन्होंने कहा, “इस स्थान पर हमला किया जाना महज संयोग नहीं है.”

उन्होंने कहा, “हमारी संसद के मूल्यों को हराने की हर कोशिश नाकाम रहेगी और बुरी ताकतें हमें कभी हरा नहीं कर पाएंगी. हमारी संवेदनाएं व प्रार्थनाएं मृतकों व उनके परिजनों तथा पीड़ितों के साथ है.”

हमले के पीड़ितों के सम्मान में डॉउनिंग स्ट्रीट पर झंडों को आधा झुका दिया गया.

भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की निंदा की है. राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा, “लंदन में हमले के बारे में सुनकर दुख हुआ. पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना। घायलों के जल्द स्वस्थ्य होने की प्रार्थना कर रहा हूं.”

उन्होंने कहा कि भारत, ब्रिटेन के साथ है. उन्होंने यह भी कहा कि ‘अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई करने की जरूरत है.’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लंदन में आतंकवादी हमले के बारे में जानकर दुख हुआ। हमारी संवेदनाएं एवं प्रार्थना पीड़ितों तथा उनके परिवार के साथ हैं। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की इस मुश्किल घड़ी में ब्रिटेन के साथ है.”

अमेरिका, फ्रांस तथा यूरोपीय संघ ने भी हमले की निंदा की. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री से बात की और हमले के बाद ब्रिटिश प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया को सराहा.

फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ब्रिटेन के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा, “हमें समझना होगा कि आतंकवाद हम सभी के लिए चिंता का कारण है। ब्रिटेन के लोग आज किस त्रासदी से गुजर रहे हैं, फ्रांस इसे अच्छी तरह समझता है, जो स्वयं कई बार आतंकवादी हमलों का शिकार बन चुका है.”

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने कहा, “मेरी संवेदनाएं पीड़ितों के साथ हैं. यूरोप आतंकवाद के खिलाफ ब्रिटेन के साथ खड़ा है और उसे हरसंभव मदद देने को तैयार है.”