ईवीएम से छेड़छाड़ का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग की स्वायत्ता पर सवाल

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को मिला प्रचंड बहुमत विपक्षी नेता अब भी पचा नहीं पा रहे हैं. वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ का मुद्दा तमाम राजनीतिक दलों ने उठाया और अब यह मामला सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 24 मार्च को सुनवाई करेगा. हालांकि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ईवीएम से किसी भी तरह की छेड़छाड़ संभव ही नहीं है.

गौरतलब है कि शनिवार 11 मार्च को मतगणना का काम पूरा भी नहीं हुआ था और अपनी करारी हार से तमतमाई बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने हार की ठीकरा ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर फोड़ दिया. बाद में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी ईवीएम पर सवाल खड़े किए थे.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी गोवा और पंजाब में मन मुताबिक नतीजे नहीं आने पर ईवीएम पर ही सवालिया निशान लगाए. यही नहीं पिछले साल पश्चिम बंगाल में बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी भी ईवीएम पर सवाल उठाकर इस मुद्दे में शामिल हो गईं.

चुनाव आयोग एक निष्पक्ष और स्वायत्त संस्था है, ऐसे में ईवीएम पर सवाल खड़े करके तमाम विपक्षी पार्टियों ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्ता पर सवाल खड़े किए हैं. अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है.