हरिद्वार : नमामि गंगे के लिए मोदी सरकार ने स्वीकृत किए 414 करोड़

केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार ने पवित्र नदी गंगा को बचाने के लिए महत्वकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ शुरू की थी. इस योजना के तहत गंगोत्री से गंगा सागर तक इस जीवन दायिनी नदी को स्वच्छ रखने का संकल्प मोदी सरकार ने लिया है.

धार्मिक नगरी हरिद्वार में उपेक्षित पड़ी मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘नमामि गंगे’ को सरकार बदलते ही रफ्तार मिल गई है. केंद्र सरकार ने यहां पर गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने को विभिन्न कामों के लिए 414 करोड़ की योजनाओं को अंतिम स्वीकृति दे दी है.

गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत विभिन्न काम होने हैं. इनका शुभारंभ पिछले वर्ष सात जुलाई को केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने हरिद्वार से किया था. उस वक्त उन्होंने परियोजना के तहत निर्माण कार्यों की शुरुआत एक अक्टूबर 2016 से हो जाएगी और प्रथम चरण का काम दिसंबर तक पूरा भी हो जाएगा. ऐसा हुआ नहीं, इसे लेकर राज्य की कांग्रेस और केंद्र की भाजपा सरकार ने एक-दूसरे पर सहयोग न करने का आरोप लगाया था.

राज्य में कांग्रेस सरकार के हटते ही योजना पर पड़ी धुंध भी छंट गई. केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई के शहरी सीवरेज जल के ट्रीटमेंट के लिए बनाए जाने वाले एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) और गंगा में गिर रहे नालों की टेङ्क्षपग के काम के लिए लंबित पड़ी 414 करोड़ की योजना को अपनी अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी.

गंगा अनुरक्षण व निर्माण इकाई हरिद्वार के अधिशासी अभियंता आरके जैन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इसके तहत आठ नालों की टैपिंग, पुराने पंपिंग स्टेशन का उच्चीकरण, जगजीतपुर स्थित 27 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी और सराय स्थित 14 एमएलडी की क्षमता वाले एसटीपी का उच्चीकरण किया जाएगा.

इसके अलावा जगजीतपुर व सराय में क्रमश: 68 व 14 एमएलडी की क्षमता वाले दो नए एसटीपी बनाए जाने हैं. साथ ही इन सभी 15 वर्षों तक रख-रखाव व बिजली प्रबंधन भी किया जाना है. बताया कि इससे अभी तक हरिद्वार के शहरी क्षेत्र से निकलने वाले सीवरेज जल के बड़े हिस्से को जिसे ट्रीटमेंट की माकूल व्यवस्था न होने से सीधे गंगा में बहा दिया जाता था, उसके ट्रीटमेंट का इंतजाम हो जाएगा. योजना के तहत निर्माण और अनुरक्षण कार्य का काम अगले दो वर्षों में पूरा हो जाएगा.

धार्मिक नगरी में शहरी क्षेत्र से निकलने वाले सीवरेज का बड़ा हिस्सा रोजाना सीधे गंगा में बहा दिया जाता है. जलसंस्थान और नगर निगम सूत्रों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में रोजाना 110 एमएलडी सीवरेज जल और 40 एमएलडी ड्रैनेज जल उत्सर्जित होता है.

मेलों और स्नान पर्वों में इसकी मात्रा 10 से 20 एमएलडी तक बढ़ जाती है. शहर में इन्हें शोधित करने की कुल क्षमता 63 एमएलडी ही है, वह भी तब जब तीनों एसटीपी पूरी क्षमता के साथ 24 घंटे काम करें. बिजली आदि न आने पर और एसटीपी के खराब रहने पर इसकी स्थिति और भी खराब हो जाती है. शहरी क्षेत्र में अधिकांश इलाकों में ड्रैनेज को सीवरेज से जोड़ दिया गया है. इससे शहरी क्षेत्र की स्थिति बेहद खराब हो गई है.