अदालत के आदेश ने एक किसान को बना दिया स्वर्ण शताब्दी ट्रेन का मालिक

पंजाब में लुधियाना की एक जिला अदालत ने जमीन अधिग्रहण के एक मामले में रेलवे की ओर से किसान को मुआवजा नहीं दिए जाने पर अजीब फैसला सुनाया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन और लुधियाना स्टेशन को 45 वर्षीय पीड़ित किसान संपूर्ण सिंह के हवाले किया जाए. पीड़ित की अपील पर अदालत ने स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन की कुर्की का आदेश दिया.

दरसअल, मामला साल 2007 में लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के निर्माण से जुड़ा है. कोर्ट ने रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा 25 लाख प्रति एकड़ से बढ़ाकर 50 लाख प्रति एकड़ कर दिया गया था. इस तरह से संपूर्ण सिंह का कुल मुआवजा 1 करोड़ 47 लाख बनता था, लेकिन रेलवे ने उसे मात्र 42 लाख रुपये का भुगतान किया. 2012 में शुरू हुए इस मुकदमे का फैसला 2015 में आ गया था, लेकिन रेलवे ने फिर भी इस रकम का भुगतान नहीं किया. इसके बाद किसान ने फिर से कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद लुधियाना जिला और सत्र न्यायाधीश ने यह अजीब फैसला सुनाया.

अदालती आदेश के बाद किसान संपूर्ण सिंह तकनीकी रूप से स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के मालिक बन गए हैं. लेकिन, जैसा कि तय था किसान इस ट्रेन को अपने घर नहीं ले जा सका. ट्रेन पर अपना कब्जा लेने के लिए किसान अपने वकील के साथ रेलवे स्टेशन भी पहुंचा. अदालत का आदेश रेल ड्राइवर को भी सौंपा गया. रेलवे के सेक्शन इंजीनियर ने ट्रेन को किसान के कब्जे में जाने से रोक दिया और बताया गया कि ये ट्रेन कोर्ट की संपति है.

किसान संपूर्ण सिंह के वकील ने ट्रेन के ड्राइवर को कोर्ट का आदेश थमाया और नोटिस चस्पा कर दिया. इसके बाद ट्रेन अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गई. किसान संपूर्ण सिंह ने कहा कि उन्होंने ट्रेन को इसलिए नहीं रोका, क्योंकि यात्रियों को दिक्कत होती. किसान के वकील का कहना है कि अगर मुआवजे की रकम नहीं मिली तो अदालत से कुर्क की गई रेलवे की संपत्ति की नीलामी की सिफारिश की जाएगी.