…तो इस बार भी पौड़ी जिले से ही होगा उत्तराखंड का मुख्यमंत्री!

उत्तराखंड का पौड़ी जिला अभिभाजित उत्तर प्रदेश के जमाने से राज्यी की राजनीति में सिरमौर रहा है. इस जिले की बादशाहत उत्तराखंड बनने के बाद भी कायम है. पौड़ी जिला उत्तर प्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आए उत्तराखंड की राजनीति में आज भी अहम स्थान रखता है. राज्य गठन के बाद से आज तक के पौड़ी के इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि आज भी पौड़ी जिले के ही इर्द-गिर्द इस पहाड़ी राज्य की राजनीति घूमती रही है.

उत्तराखंड को सबसे अधिक मुख्यमंत्री देने के साथ ही कैबिनेट मंत्रियों की फौज देने वाला ये पौड़ी जिला ही है जो इस विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम देने की होड़ में सबसे आगे है.

अभिभाजित उत्तर प्रदेश के जमाने से वीवीआईपी जिलों की फेहरिस्त में शामिल पौड़ी जिला आज भी राज्य की राजनीति में सिरमौर बना हुआ है. पौड़ी के छोटे से गांब बुघाणी से निकलकर उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले स्व. हेमवंती नंदन बहुगुणा से शुरू हुई पौड़ी की राजनीतिक पारी उत्तराखंड में भी आज भी सभी जिलों पर भारी है.

यदि उत्तराखंड की राजनीति की बात की जाए तो पौड़ी जिले ने मुख्यमंत्री के रूप में भुवनचंद्र खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा जैसे चर्चित चेहरे इस सूबे को दिए, जिन्होंने राजनीति में अपनी अलग ही छाप छोड़ी. इतना ही नहीं उतर प्रदेश को गोरखपुर के तेज-तर्रार सांसद योगी आदित्यनाथ से लेकर उतराखंड में भी पौड़ी ने एक दर्जन कैबिनेट मंत्रियों के साथ ही दर्जनों दायित्व धारियों की फौज भी दी है, जिन्होंने समय-समय पर अपने राजनीतिक दम-खम का परिचय दिया है.

उधर, दूसरी ओर इस बार के विधानसभा चुनाव के बाद भी पौड़ी जिला एक बार फिर से सुर्खियों में बना हुआ है. दरअसल भाजपा के जिन भी सम्भावित नेताओं के नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, वह भी पौड़ी जिले से ही हैं. सतपाल महाराज, त्रिवेन्द्र सिंह रावत और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी के ही नाम ले लीजिए जो पौड़ी जिले से ही ताल्लुक रखते हैं.