उत्तराखंड : आरोपियों से ही होगी टैक्सी बिल घोटाले की रकम की भरपाई

उत्तराखंड के बहुचर्चित टैक्सी बिल घोटाले में आरोपियों से ही घोटाले की रकम वसूलने की तैयारी में है. अब यह कार्मिक विभाग तय करेगा कि सरकार को जो नुकसान हुआ, किस आरोपी से कितने अर्थदंड की वसूली की जाए.

इसके साथ ही आरोपियों पर कार्रवाई के लिए पत्रावली कार्मिक विभाग को भेज दी गई है, ताकि वह इस पर उचित कदम उठा सके. इस घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सचिव का नाम भी शामिल है.

राज्य में बहुचर्चित टैक्सी बिल घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के साथ ही अन्य विभागों के कर्मचारी भी जांच के घेरे में आए थे. जो बात सामने आई है कि निजी सचिव कैडर, अनुभाग अधिकारी और मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने नियमविरुद्ध पत्र जारी किए थे. पत्र जारी करने का अधिकार केवल उप सचिव अथवा उससे उच्च स्तर के अधिकारियों को है.

जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि निजी सचिवों ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिलों का भुगतान किया है. यहां तक कि बिलों का समुचित तरीके से भी परीक्षण नहीं किया गया. जांच में कई बिल ऐसे पाए गए हैं, जिनका भुगतान टैक्सी के नंबरों पर हुआ, लेकिन इनमें से कुछ नंबर स्कूटरों के थे.

इस मामले की जांच अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश कर रहे हैं। उनके कार्यालय की ओर से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सचिवालय प्रशासन को भी पत्र भेजा गया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है.

चूंकि इस घोटाले में अन्य विभागों के कर्मचारी भी संलिप्त हैं, ऐसे में अब एक पत्र कार्मिक को भी भेजा गया है. कार्मिक से आरोपियों पर कार्रवाई करने के साथ ही इस घोटालों में सरकार को हुए नुकसान की वसूली कर्मचारियों करने को कहा गया है. अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने बताया कि मामले में कार्रवाई के लिए कार्मिक को पत्र भेजा गया है.