यूपी-उत्तराखंड में बड़ी जीत के बाद अपनी ‘पसंद का राष्ट्रपति’ बनाने के करीब पहुंची बीजेपी

बीजेपी की उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुई अभूतपूर्व जीत से अगले राष्ट्रपति का चुनाव करने वाले निर्वाचक मंडल में उसके मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा होना सुनिश्चित हो गया है. मौजूदा राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इसी साल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है और राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जून में जारी होगी.

हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.

विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.

राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली शानदार जीत की गूंज अब राज्यसभा और राष्ट्रपति भवन में भी सुनाई देगी और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इन नतीजों का बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता मायावती के राजनैतिक करियर पर भी पड़ेगा.

उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.