चमोली : मंगलयान की सफलता के ढाई साल बाद पहुंची इस गांव में सड़क, झूम उठे ग्रामीण

भारत का मंगलयान 24 सितंबर 2014 को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंच गया था और अब चांद पर इंसान भेजने की भी तैयारी हो रही है. लेकिन देश के कई कोने ऐसे भी हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची. कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां के लोग पहली बार अपने गांव में गाड़ी देख रहे हैं. ऐसा ही एक गांव उत्तराखंड के चमोली जिले में भी है. मंगलयान की सफलता के करीब ढाई साल बाद इस गांव में सड़क पहुंची है.

करीब एक दशक की कोशिशों के बाद चमोली जिले के मेड़ ठेली गांव में लोक निर्माण विभाग ने सड़क पहुंचा दी है. गांव में सड़क पहुंचने की खुशी से ग्रामीण झूम उठे. यही नहीं गांव तक वाहन को ले जाया गया. साथ ही ग्रामीणों ने वाहन की पूजा-अर्चना भी की.

साल 2007 में चमोली जिले के मेड़ ठेली गांव के लिए कुहेड़ मथरपाल सड़क स्वीकृत हुई थी. पहले कुछ समय तक तो वन भूमि स्थानांतरण के चलते इस सड़क पर निर्माण कार्य लटका रहा. ग्रामीणों ने कई दौर के आंदोलन किए. तब जाकर लोक निर्माण विभाग द्वारा साल 2015 में इस सड़क पर निर्माण कार्य शुरू किया गया.

निर्माण की कछुवा चाल पर भी कई बार ग्रामीणों की ओर से आंदोलन व विरोध प्रदर्शन किए गए. तब जाकर निर्माण कार्य में तेजी लाई गई. लोक निर्माण विभाग ने एक साल पहले पलेठी तक सड़क का निर्माण कर दिया गया था. लेकिन उसके बाद काम बंद कर दिया था. इससे मेड़ ठेली के ग्रामीणों को तीन किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही थी.

लोनिवि ने अब इस सड़क पर कटिंग का कार्य मेड़ ठेली गांव तक पूरा कर दिया है. कटिंग पूरी होने के बाद स्थानीय ग्रामीण ठेली गांव तक जीप ले गए. गांव में वाहन के पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर देखी गई.

गांव की महिलाओं ने गांव में पहुंचे वाहन की पूजा अर्चना की. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद ही सही उनकी यातायात सुविधा पाने की मुराद पूरी हो पाई है. ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत, धीरज सिंह, शुभद्रा देवी, शिशुपाल सिंह, सूर सिंह, मंगसीरी देवी, माहेश्वरी देवी आदि ग्रामीण जीप वाहन की पूजा अर्चना में शामिल हुए.