उत्तराखंड में पसरते माओवादियों को लगा झटका । दो बड़े कमांडरों को सजा

(साभार - जागरण)

2014 के लोकसभा चुनाव और मौजूदा विधानसभा चुनाव से पूर्व पोस्टर चस्पा कर जनयुद्ध आंदोलन के जरिए संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की योजना बनानेवाले और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व उत्तरी बिहार में ‘रेड कॉरिडोर’ की योजना को अंजाम दे रहे माओवादी थिंक टैंक प्रशांत सांगलेकर उर्फ प्रशांत राही तथा पहली पांत के कमांडार हेम मिश्रा के महाराष्ट्र में चल रहे मुकदमों में दोषी सिद्ध होने से कुमाऊं में माओवादी विचारधारा की जड़ें हिल गई हैं..

बीएचयू से एमटेक प्रशांत राही मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले है. प्रशांत राही को प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का फ्रंटल विचारक के तौर पर जिम्मा सौंपा गया था. वह 90 के दशक से अविभाजित उत्तर प्रदेश (तराई-भाबर व कुमाऊं-गढ़वाल के पर्वतीय जिले) में सक्रिय रहे. उन्हें दिसंबर 2007 में हंसपुर खत्ता व सौफुटिया के जंगल में माओवादी कैंप चलाते गिरफ्तार किया गया. नानकमत्ता व रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) में राही के खिलाफ मुकदमा चला. 2011 में वह बेल पर बाहर आया.

इसके बाद वह महाराष्ट्र गए, जहां फिर नक्सलवादियों की मदद के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया. सूत्रों के मुताबिक राही के दो विवाह हैं. उसकी दूसरी पत्नी मानपुर पश्चिम, हल्द्वानी की चंद्रकला तिवारी है.

हेम मिश्रा ने जेएनयू में चीनी भाषा में डिप्लोमा भी किया. साथ ही डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) की कार्यकारिणी सदस्य भी रहे. संगठन ने मिश्रा से बुद्धिजीवी वर्ग में पैठ तथा लोगों को प्रभावित करने का जिम्मा दिया था.