ऋषिकेश : गंगा तट पर अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की धूम, तरह-तरह के योग कर रहे साधक

ऋषिकेश में गंगा तट पर जहां योग साधक पसीना बहा रहे हैं, वहीं साधक योग निद्रा के माध्यम से आराम कर रहे हैं तो कोई ध्यान मुद्रा, प्राणायाम, सत्संग व कीर्तन में लीन हैं. अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में इन दिनों योग के इंद्रधनुषी रंग नजर आ रहे हैं.

गुरुवार को योग कक्षाओं की शुरुआत कैलिफोर्निया अमेरिका से आए गुरुशब्द सिंह खालसा के कुण्डलिनी योग के अभ्यास के साथ हुई. बौद्धिक सत्र में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि गंगा की तरह ही योग की अनवरत धारा प्रवाहित करना योग महोत्सव का उद्देश्य है, जो सफलता की ओर बढ़ रहा है.

गंगा और योग दोनों की ओर दुनिया के लोग आकर्षित हो रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि जिस तरह अलग-अलग दिशाओं से निकलने वाली नदियां एक साथ समुद्र में मिलती हैं और हमें एक दूसरे से जोड़ने का संदेश देती हैं, ठीक उसी तरह योग हमें आपस में जुड़ने का संदेश देता है. उन्होंने नदियों के संरक्षण व उन्हें प्रदूषणमुक्त करने के लिए संकल्प दिलवाया.

इस मौके पर वृदांवन से आए दल के साथ सभी प्रतिभागियों ने मिलकर अपने-अपने देश की नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प लिया. साथ ही विशेष रूप से गंगा, यमुना, अमेजन एवं यांग्जी नदियों के संरक्षण के लिए चर्चा हुई.

उधर प्रात: कालीन अन्य कक्षाओं में हार्ट ऑफ कम्पैशन, पारंपरिक हठ योग एवं सूर्य नमस्कार, ‘इनबाउण्ड योग’ व ‘टाई-ची’ का अभ्यास कराया गया. इसके अतिरिक्त बाली इंडोनेशिया से डॉ. आंड्रिया पेज ने स्वास्थ्य की बुनियाद पर परिचर्चा की, जबकि हवाई द्वीप अमेरिका से आयी आनन्द्रा जार्ज ने गंगा के तट पर संगीतमय ध्यान कराया साथ ही सूर्योदय नाद योग का भी अभ्यास करावाया.

मुंबई से आये योगाचार्य परमानन्द अग्रवाल व शिल्पा जोशी ने अष्टांग योग के मूलभूत तथ्यों एवं ध्यानमय आसनों का अभ्यास कराते हुए अस्थमा एवं डायबिटीज के लिए विशेष योगासनों का अभ्यास कराया.

आध्यात्मिक संवाद श्रृंखला में लद्दाख के संत भिक्खु संगसेना ने बुद्धिस्ट ध्यान का अभ्यास कराते हुए मन को एकाग्रचित करने के साथ चित को शांत करने की विधा के बारे में समझाया.