उत्तराखंड के सभी वाहनों पर लगेगी ‘माइक्रो चिप’। स्कैनर आसानी से कर पाएंगे ट्रैस

सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के नए प्रस्तावों में चिप रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया गया है. इसी क्रम में उत्तराखंड में जल्द ही नई तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया जाएगा.रजिस्ट्रेशन के वक्त लगाई जाने वाली इस चिप का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब वाहन स्वामी को कागजात रखने के झंझट से भी निजात मिल जाएगी.

बस एक चिप और वाहन की कुंडली कंप्यूटर स्क्रीन पर. इस चिप में रजिस्ट्रेशन, वाहन का बीमा और फिटनेस से संबंधित सभी जानकारियां दर्ज होंगी. विंड स्क्रीन अथवा दुपहिया पर आगे की ओर चस्पा चिप को टोल बैरियर पर लगे स्कैनर आसानी से ट्रैस कर लेंगे.

संभागीय परिवहन अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन (आरएफआइडी) प्रोजेक्ट के लिए परिवहन संभाग को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वाहनों की सुरक्षा की दृष्टि से यह एक कारगर कदम होगा। गर्ग के अनुसार वर्तमान में हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट का प्रचलन है, लेकिन इससे उतना लाभ नहीं मिल पाया जितनी उम्मीद थी.
वजह यह कि एक तो यह नंबर प्लेट सिर्फ नए वाहनों में लगाई जा रही थी, पुराने वाहनों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया. दूसरा जिन कंपनियों को नंबर प्लेट लगाने का जिम्मा सौंपा गया, वे समय से प्लेट उपलब्ध कराने में नाकामयाब रहीं.जबकि इस चिप को नए पुराने सभी वाहनों में लगाना अनिवार्य होगा.

संभागीय परिवहन अधिकारी के मुताबिक चेकिंग के दौरान हैंड मशीन से भी चिप में दर्ज सूचना पढ़ी जा सकती है. रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और फिटनेस की खत्म होने पर चिप को अपडेट कराना होगा. पुलिस व परिवहन विभाग को चेकिंग के दौरान आरआइएफडी स्कैनर साथ रखने होंगे.

नई तकनीक से वाहन चोरी का खतरा कम हो जाएगी. सड़क पर दौड़ते चोरी के वाहन को चिप की मदद से आसानी से ट्रेस किया जा सकेगा. अगर कोई इस चिप को उतार कर वाहन चलाएगा तो भी वाहन के बारे में तहकीकात होगी और मामला पकड़ में आ जाएगा