‘GDP आंकड़ों में विकास की दर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, यह ‘फर्जी’ है’

कांग्रेस और वामदलों ने नोटबंदी के बाद भी मजबूत जीडीपी आंकड़े को लेकर बुधवार को संदेह जताया, वहीं सरकार ने कहा कि यह दर्शाता है कि नोटबंदी से विकास की गति को कोई नुकसान नहीं हुआ.

कांग्रेस ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आंकड़ों को ‘हैरानी भरा’ और ‘बेहद संदेहास्पद’ बताया वहीं माकपा और भाकपा ने आरोप लगाया कि विकास की दर ‘बढ़ा-चढा’ कर पेश की गई तथा यह ‘फर्जी’ है.

नोटबंदी से विकास को नुकसान होने की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीडीपी के ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि नोटबंदी से विकास की दर प्रभावित नहीं हुई. वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जोर दिया कि वृद्धि दर ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर पेश की जाने वाली बातों को झुठला दिया है.

कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि जीडीपी आंकड़े ‘हैरानीपूर्ण’ और ‘बेहद संदेहास्पद’ हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय आंकड़ों की साख खराब हो सकती है. इसके साथ ही शर्मा ने प्रधानमंत्री तथा वित्त मंत्री पर लोगों को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाया.

शर्मा ने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़े ‘भ्रामक’ हैं क्योंकि नौकरियों तथा उत्पादन में कटौती सहित नोटबंदी के प्रतिकूल असर में ये कारक नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘जारी किए गए जीडीपी आंकड़े हैरानीपूर्ण और बेहद संदेहास्पद है. पेश की जा रही जीडीपी दर संदेहास्पद है और वैश्विक स्तर पर भारतीय आंकड़ों की साख को खराब करेगी.’

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को लोगों को ‘गुमराह’ नहीं करना चाहिए तथा इसकी बजाए असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार का प्रचार करने वालों को ‘अपरिपक्व जश्न मनाने और गलत उत्साह’ से बचना चाहिए.

सरकारी आंकड़ों का उपहास करते हुए माकपा ने कहा कि यह ‘फर्जी राष्ट्रवाद’ की तरह है. माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ‘यह फर्जी राष्ट्रवाद से फर्जी आंकड़ों के समान है…अगर इस विकास दर पर भरोसा किया जाए तो नोटबंदी के दुष्प्रभाव के बिना तीसरी तिमाही में जीडीपी विकास दर क्या होती? 25 प्रतिशत?’ भाकपा ने भी सरकारी आंकडों पर संदेह जताया और कहा कि इसे ‘बढ़ा चढ़ाकर’ पेश किया गया है.

भाकपा महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने कहा कि उन्हें संदेह है कि क्या नोटबंदी के बाद जीडीपी विकास दर 7.1 प्रतिशत दर संभव है. नोटबंदी के आलोचकों पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने अर्थशास्त्रियों पर निशाना साधा और कहा कि हार्वर्ड से ज्यादा प्रभावशाली हार्ड वर्क (कठिन मेहनत) है.

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में एक चुनावी सभा में कहा कि देश के ईमानदार लोगों, किसानों और नौजवानों ने जीडीपी में सुधार के जरिए ‘हार्वर्ड और हार्ड वर्क’ वालों की सोच के बीच फर्क जाहिर कर दिया है.

उन्होंने कहा ‘एक ओर हार्वर्ड के विद्वान हैं और दूसरी ओर एक गरीब मां का बेटा है जो अपने हार्ड वर्क से देश की अर्थनीति बदलने में लगा हुआ है. देश के ईमानदारों ने दिखा दिया है कि हार्वर्ड से ज्यादा दम हार्ड वर्क में है.’

मालूम हो कि नोबेल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार के नोटबंदी के कदम की कड़ी आलोचना की थी.

ब्रिटेन से सुबह ही लौटे जेटली ने कहा कि तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सात प्रतिशत की वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को लेकर सभी आशंकाओं को पीछे छोड़ दिया है.

उन्होंने कहा, ‘मैं यह लगातार कह रहा था कि राजस्व (कर संग्रह) के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि वृद्धि हो रही है. ये आंकड़े वास्तव में वृद्धि के वास्तविक स्तर को बताते हैं. कुछ क्षेत्र, खासकर नकद लेन-देन पर बहुत अधिक आश्रित और काले धन से चलने वाले क्षेत्र इससे अधिक प्रभावित हुए होंगे’