कांग्रेस हार गई तो ठीक, नहीं हारी तो भी 11 मार्च को इस्तीफा दे देंगे हरीश रावत!

11 मार्च को मुख्यमंत्री हरीश रावत राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं. चौंकने की कतई जरूरत नहीं है. दरअसल चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचित विधायकों की अधिसूचना जारी होने के बाद संविधान की परम्परा के मुताबिक नई सरकार के गठन के लिए हरीश रावत को ऐसा करना पड़ेगा. हालांकि राज्यपाल नई सरकार के गठन तक उन्हें पद पर बने रहने को कह सकते हैं.

राज्य में नई सरकार के गठन के लिए सरकारी मशीनरी तैयार हो गई है. विधायकों के ठहरने से लेकर विधानसभा में होने वाली गतिविधियों के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है. उत्तराखंड में नई सरकार की राजनीतिक चहल-पहल 11 मार्च को शुरू होगी, लेकिन सरकारी मशीनरी अपना होमवर्क पूरा कर रही है. नई सरकार गठन के लिए शासन से लेकर विधानसभा तक तैयारी की जा रही है.

निर्वाचन आयोग 11 मार्च या 12 मार्च को जब नए विधायकों के निर्वाचित होने की अधिसूचना जारी करेगा तभी नई विधानसभा का गठन हो जाएगा. संवैधानिक व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री और कैबिनेट के सदस्यों को राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाई जाती है. जबकि विधानसभा सदस्यों को प्रोटेम स्पीकर शपथ दिलाएंगे. प्रोटेम स्पीकर के चयन पर राज्यपाल अपनी मुहर लगाएंगे.

संवैधानिक व्यवस्था के तहत नए स्पीकर का चुनाव भी प्रोटेम स्पीकर ही कराते हैं. उत्तराखंड विधानसभा में इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है.

विधानसभा सचिव जगदीश चन्द्र कहते हैं कि मुख्यमंत्री और उनका मंत्रिमंडल सामान्यत: राजभवन में शपथ लेता है, जबकि बचे हुए विधायकों को विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर द्वारा शपथ दिलाई जाती है. विधानसभा में संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक तैयारी की जा रही है.

70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में 15 फरवरी को 69 सीटों के लिए मतदान हुआ और शेष बची एक सीट पर 9 मार्च को वोटिंग होगी. जबकि मतगणना एक साथ 11 मार्च को होगी. नए विधायकों के लिए शासन स्तर पर भी तैयारी चल रही है. नई सरकार के मंत्रियों और विधायकों के रहने का भी इंतजाम किया जा रहा है.

राज्य सम्पत्ति अधिकारी विनय शंकर पांडेय के मुताबिक एमएलए हॉस्टल, सर्किट हाउस, ऑफिसर्स हॉस्टल और बीजापुर गेस्ट हाउस में खास इंतजाम राज्य सम्पत्ति विभाग की ओर से किए जा रहे हैं.

सरकार किसकी बनेगी और विधायकी का चुनाव कौन जीतेगा ये तो 11 मार्च को ही तय होगा, लेकिन सरकारी मशीनरी माननीयों की आवभगत में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती. यही वजह है कि शासन के बड़े अधिकारी भी इस मामले पर अभी से होमवर्क कर रहे हैं.