उत्तरकाशी : पुलिस अधीक्षक ने दिखायी सख्ती, गायब नाबालिग लड़कियों के मामले में केस दर्ज

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में दो नाबालिग दलित लड़कियों की मानव तस्करी के संदिग्ध मामले में पुलिस ने अंतत: मामला दर्ज कर लिया. पिछले आठ दिनों से हीला-हवाली कर रही पुलिस ने जिले के पुलिस अधीक्षक की सख्ती के बाद यह कदम उठाया.

बड़कोट क्षेत्र के पौंटी गांव से 20 फरवरी को गायब हुई 15 और 16 वर्ष की उम्र की दो नाबालिग दलित लड़कियों के मामले में भारतीय दंड संहिता धारा 363 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

पेशे से किसान दर्शन लाल और जग्गुलाल की लड़कियां आपस में सहेलियां थीं और उनके गायब होने के बाद उनके परिजनों ने शक जाहिर किया था कि रिश्तेदारी के नाते पड़ोस में आए हरियाणा से कुछ लोग उन्हें बरगला कर कहीं ले गए.

परिजन इसकी लिखित शिकायत लेकर बड़कोट थाने गए, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों ने संबंधित पक्ष से बातचीत कर जल्द मामला सुलझाने की बात कहते हुए शिकायत लेने से मना कर दिया.

इस दौरान बीते दिनों बड़कोट पहुंचे पुलिस अधीक्षक ददन पाल को भी थाने ने मामले में गुमराह किया, जिस पर उन्होंने खासी नाराजगी जाहिर की. पाल ने थाने के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को आड़े हाथों लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने को कहा. इस पर हरकत में आते हुए पुलिस ने दर्शन लाल की तहरीर पर धारा 363 के तहत मामला दर्ज किया.

हालांकि, अन्य लड़कियों की कोई सूचना नहीं होने से उनके परिजन बहुत परेशान हैं. मामले के जांच अधिकारी उपनिरीक्षक रवि ने बताया कि शिकायत के अनुसार शक के दायरे में आई एक महिला से पूछताछ की जा रही है और जल्दी की मामला सुलझा लिया जाएगा.

पाल का कहना है कि मामले को तत्परता से निपटाया जाएगा और लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी. उत्तरकाशी के पूर्व पुलिस अधीक्षक जगत राम जोशी ने यमुनाघाटी के दूरस्थ इलाकों में बढ़ती मानव तस्करी को लेकर लगभग आधा दर्जन जागरुकता शिविरों का आयोजन कर लोगों को इससे बचाव के तरीकों के बारे में बताया था, लेकिन वहीं बड़कोट थाने की पुलिस ने पौंटी गांव से गायब हुई लड़कियों के मामले में ढुलमुल रवैया अपनाकर महकमे को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है.