‘यूपी का चीरहरण होता रहा और मैं भीष्म की तरह बेबस होकर देखता रहा’

राज्‍यसभा सांसद अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी से निष्‍कासित किए जाने पर मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को धन्‍यवाद दिया है. उन्‍होंने कहा कि अब वे आजाद महसूस कर रहे हैं. यही नहीं अमर सिंह ने उत्तर प्रदेश की तुलना द्रौपदी से करते हुए कहा कि गायत्री प्रजापति जैसे लोग उनके सामने यूपी का चीरहरण करते रहे और वह धर्मयुद्ध में कौरवों के साथ खड़े भीष्‍म पितामह और द्रोणाचार्य की तरह सिर झुकाकर सब देखते, सहते रहे.

उन्होंने कहा, इसके लिए वह खुद को भी बराबर का दोषी मानते हैं. हालांकि अखिलेश के माफी मांगने पर सपा में फिर वापसी की संभावनाओं से उन्‍होंने इनकार भी नहीं किया. कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से भी उन्‍होंने गलत टिप्‍पणी करने को लेकर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी है.

राष्‍ट्रवाद के समक्ष चुनौती विषय पर आयोजित संगोष्‍ठी और प्रेस कांफ्रेस में अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव सहित, मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव, आजम खान, गायत्री प्रजापति पर जमकर निशाना साधा. इस पूरी बातचीत के दौरान बीजेपी के प्रति उनका रवैया नरम दिखा.

बीजेपी के प्रति सॉफ्ट कार्नर के सवाल पर अमर सिंह ने परिवार और बच्‍चों की कसम खाते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी जी से उनके ताल्‍लुक पुराने जरूर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सिर्फ तीन मुलाकात हुई वह भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में. बीजेपी से उनका कोई संबंध नहीं है. उन्‍होंने कहा कि अखिलेश अपने पिता के ही पगचिन्‍हों पर चल रहे हैं. एक बार पिता ने निकाला, दूसरी बार बेटे ने वही काम दोहराया.

अमर सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री को गधा कहना गलत है, इसके बाद जब मोदी ने हमला किया तो वह लोग कहने लगे कि हमारा वो मतलब नहीं था. देश के प्रधानमंत्री के बारे में ऐसी बातें अशोभनीय है. वह चाहे मोदी हों या मनमोहन. लालू पर हमला करते हुए अमर सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने सेक्‍यूलर और कम्‍यूनल का पेटेंट करा रखा है. लालू जैसे लोग उन्‍हें जब चाहें छूकर कम्‍यूनल और सेक्‍यूलर का तमगा दे देते हैं. मोदी को वह लोग आतंकवादी कहते हैं, जिनके सीधे संबंध आतंकी गतिविधियों में लिप्‍त लोगों से है.

उन्‍होंने कहा कि मैं सीधे तौर पर आजम खान और अखिलेश यादव का नाम लेना चाहूंगा। वह लोग बताएं कि फरहान, अलताफ, हाफिज और दाउद इब्राहिम के छोटे भाई अनीस इब्राहिम से इन लोगों के कौन से संबंध हैं. उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद और राष्‍ट्रवाद पर बहस की असली जगह संयुक्‍त राष्‍ट्र है, गोरखपुर में तो बात नेपाल में अत्‍याचार सह रहे यूपी, बिहार के उन मधेसी भाइयों की होनी चाहिए जिन पर माओवादी लगातार अत्‍याचार कर रहे हैं.

उन्‍होंने कहा कि चुनाव के इस समय वह किसी पार्टी का समर्थन या विरोध करने नहीं आए हैं. हमें सबसे पहले विचारों के आतंकवाद से लड़ना है. कोई भी राजनैतिक दल या नेता हो अपनी जरूरत के हिसाब से बयान बदलता रहता है ये वैचारिक आतंकवाद है, हमें आपको इससे लड़ना होगा.