हार का ठीकरा अपने सिर फूटने की आशंका से चिंता में हैं बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट : हरीश रावत

फाइल चित्र

उत्तराखंड में चुनावी आचार संहिता लागू होने के बावजूद राज्य सचिवालय में जाकर सरकारी कार्य करने तथा अधिकारियों को निर्देश देने को लेकर आलोचना झेल रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज आरोप लगाया कि जनता द्वारा नकारे जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की फजीहत का ठीकरा अपने सिर फूटने से आशंकित होकर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट ऐसे बयान दे रहे हैं.

अपने मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार के हवाले से एक बयान जारी कर रावत ने कहा कि भट्ट को अपने बयान पर जनता से माफी मांगनी चाहिए.

रावत ने आरोपों के संबंध में प्रमाण प्रस्तुत करने की चुनौती भट्ट को देते हुए कहा, ‘जनता द्वारा नकारे जाने और अपने प्रधानमंत्री मोदी जी तथा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की फजीहत कराने का ठीकरा अपने सर पर फुटेन से आशंकित होकर ही बीजेपी नेता ऐसी बयान बाजी कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि वह चुनाव आचार संहिता तथा चुनाव आयोग के हर निर्देश का मुख्यमंत्री के रूप में पूर्ण सम्मान करते हैं लेकिन बीजेपी नेता यह बताएं कि चुनाव आयोग के किस निर्देश से आपदा, वनाग्नि जैसी स्थिति में काम करने पर रोक है.

उन्होंने कहा, ’31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में केन्द्र सरकार को भेजे जाने वाले उपयोगिता प्रमाण-पत्र, केन्द्र में लंबित विभिन्न परियोजनाओं के धन की मांग की पैरवी करना मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्व निर्वहन का ही हिस्सा है. राज्य के हित में अधिकारियों को निर्देशित करना सामान्य कार्य की परिधि में आता है. इससे आचार संहिता का उल्लघंन नहीं होता. यह सामान्य ज्ञान की बात है.’ रावत ने बीजेपी नेताओं से आरोप प्रत्यारोप से बाहर आने और अपनी उर्जा का प्रयोग केन्द्र में लंबित राज्य के धन को अवमुक्त कराने में करने की सलाह दी.

पिछले सप्ताह भट्ट ने रावत पर राज्य सचिवालय जाकर अधिकारियों को निर्देश देने तथा सरकारी फाइलों को निपटाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह अपने कार्यकाल में हुई गड़बड़ियों को छुपाने के लिये ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने इसे मुख्यमंत्री द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन भी बताया था.