पिथौरागढ़: संयुक्त राष्ट्र ने स्नो लैपर्ड के संरक्षण के लिए तैयार किया रोडमैप

भारत में तकरीबन 75 हजार वर्ग किमी के हिमालयीय दायरे में हिम तेंदुआ संकट में है. प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्टरीय संघ की लाल सूची में दर्ज स्नो लैपर्ड हालिया गंगोत्री घाटी के सुंदरढूंगा ग्लेशियर में उसकी मौजूदगी कैमरे में कैद की जा चुकी है. कुमाऊं के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में भी अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिम तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई है.

हिम तेंदुओं का अस्तित्व बचाने के लिए वन मंत्रालय की पहल पर संयुक्त राष्ट की पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन के लिए काम करने वाली इकाई ने न केवल हामी भरी है, बल्कि प्रोजेक्ट का रोडमैप आखिरी चरण में पहुंच गया है.

यूएनडीपी के तहत उत्तराखंड में समुद्री सतह से 3500 से 7000 मीटर की ऊंचाई पर हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुओं के वास स्थलों को सुधारा जाएगा। वन चौकियों को और सुदृढ़ बना स्नो लैपर्ड कॉरिडोर पर कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे.बर्फीली बेल्ट में वन कमियों को पैट्रोलिंग व मॉनीटरिंग में बाधा न पहुंचे, उन्हें वर्दी व अन्य साजोसामान से लैस किया जाएगा.हिमालयीय राज्य के बाद हिम तेंदुओं की मौजूदगी वाले जम्मू कश्मीर, हिमाचल व लद्दाख क्षेत्र में भी संयुक्त राष्ट के इस विकास प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाना है.

इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि यूनाइटेड नेशन की दिल्ली स्थित शाखा में हिम तेंदुओं के संरक्षण को विकास प्रोजेक्ट अंतिम दौर में है. इसके बाद ही खर्च का ब्योरा तैयार किया जा सकेगा. यूएनडीपी के तहत उत्तराखंड में बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली व उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिम तेंदुओं के वास स्थल चिह्नित कर उन्हें माकूल बनाने की योजना है. इसके बाद देश के अन्य हिमालयीय राज्यों को भी प्रोजेक्ट में शामिल करने का प्लान है