IndvsAus: पुणे टेस्ट के दूसरे दिन टीम इंडिया पहली पारी में 105 पर ऑलआउट

स्टीवन ओकीफ (6/35) के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने महाराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम में जारी पहले टेस्ट मैच के दूसरे दिन शुक्रवार को भारतीय टीम की पहली पारी 105 रनों पर समेट दी.

मेहमान टीम ने भारत के खिलाफ अपनी पहली पारी के आधार पर 155 रनों की बढ़त ले ली है. भारतीय टीम के लिए लोकेश राहुल ने सबसे अधिक 64 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया के लिए ओकीफ के अलावा मिशेल स्टार्क को दो और जोस हाजलेवुड और नाथन लॉयन को एक-एक सफलता मिली.

केएल राहुल-64, अजिंक्य रहाणे-13 और मुरली विजय-10 सिर्फ तीन ही खिलाड़ी दहाई के अंक तक पहुंच सके. कप्तान विराट कोहली और विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा तो अपना खाता भी नहीं खोल पाए. भारत की पूरी टीम सिर्फ 40.1 ओवर में ही पवेलियन लौट गई.

सुबह के सत्र में भारत के तीन विकेट गिरे जबकि लंच के बाद भारत ने तेजी से सात विकेट गंवा दिए. यही नहीं दिन के दूसरे सत्र में ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी दूसरी पारी में 2 विकेट गंवा दिए.

इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम पुणे टेस्ट के दूसरे दिन अपनी पहली पारी में 260 के स्कोर पर ऑल आउट हो गई. दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एक ओवर भी पूरा नहीं खेल पाए और अश्विन के ओवर की 5वीं गेंद पर स्टार्क 61 रन बनाकर आउट हो गए, उन्हें जडेजा ने कैच किया. उन्होंने अपने और ऑस्ट्रेलिया के पहले दिन के स्कोर पर सिर्फ 4 रन जोड़े.

इससे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन मिशेल स्टार्क (नाबाद 57) द्वारा अंत में खेली गई जुझारू पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए) स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन गुरुवार को भारत के खिलाफ दिन का खेल खत्म होने तक नौ विकेट के नुकसान पर 256 रन बना लिए थे.

ऑस्ट्रेलिया ने अपने नौ विकेट 205 रनों पर ही खो दिए थे, लेकिन स्टार्क ने जोश हेजलवुड (नाबाद 1) के साथ दसवें विकेट के लिए 51 रनों की साझेदारी कर ऑस्ट्रेलिया को पहले ही दिन सिमटने से बचा लिया.

मेहमानों के लिए सर्वाधिक 68 रन भारत में अपना पहला मैच खेल रहे सलामी बल्लेबाज मैट रेनशॉ ने बनाए. डेविड वॉर्नर ने 38 रनों का योगदान दिया.

भारत की तरफ से पहली पारी में उमेश यादव को चार सफलताएं मिली. रविचंद्रन अश्विन ने 3 और रवींद्र जडेजा को दो विकेट मिले. जयंत यादव को एक विकेट मिला. ऑस्ट्रेलिया का निचला क्रम ढह गया. तीसरे सत्र में ऑस्ट्रेलिया ने मिशेल मार्श (4), मैथ्यू वेड (8), स्टीवन ओ कैफी (0), नाथन लॉयन (0) और रेनशॉ के विकेट गंवाए.

रेनशॉ ने अपनी पारी में 156 गेंदों में 10 चौके और एक छक्का लगाया. रेनशॉ 82 के कुल योग पर तबीयत खराब होने के कारण मैदान से बाहर जाने को मजबूर हुए थे. उस समय रेनशॉ का निजी योग 36 था. कप्तान स्मिथ का विकेट गिरने के बाद वह दोबारा मैदान पर लौटे.

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने अच्छी शुरुआत की थी और भोजनकाल तक एक विकेट के नुकसान पर 84 रन बनाए थे. वार्नर को उमेश ने 82 के कुल योग पर आउट किया था. उस समय स्मिथ एक और शॉन मार्श एक रन पर नाबाद लौटे थे.

वार्नर ने 77 गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए. उमेश ने 10 पारियों में पांचवीं बार वार्नर को आउट किया. भारतीय गेंदबाजों ने पहले सत्र के बाद शानदार वापसी की और दिन के दूसरे सत्र में तीन और आखिरी सत्र में पांच विकेट झटक कर ऑस्ट्रेलिया को संकट में डाल दिया.

लंच के बाद मार्श और स्मिथ ने दूसरे विकेट के लिए 37 रन जोड़े. मार्श को जयंत ने 119 के कुल योग पर आउट किया. इसके बाद कप्तान ने हैंड्सकॉम्ब के साथ तीसरे विकटे के लिए 30 रनों की साझेदारी की. हैंड्सकॉम्ब को जडेजा ने 149 के कुल योग पर आउट किया.

हैंड्सकॉम्ब ने 45 गेंदे खेली और अपनी पारी में तीन चौके लगाए. इसी योग पर रवीचंद्रन अश्विन ने कप्तान को चलता कर मेहमानों को चौथा और सबसे बड़ा झटका दिया.

स्मिथ पैर जमाते नजर आ रहे थे, तभी वह गलती कर बैठे और एक तरीके से अपना विकेट भारत को दे गए. अश्विन की गेंद पर वह आगे बढ़कर मिडविकेट के ऊपर से मारना चाहते थे, लेकिन गेंद सीधे कोहली के हाथों में गई. स्मिथ ने 95 गेदें खेलीं और अपनी पारी में दो चौके लगाए.

स्मिथ के जाने के बाद रेनशॉ मैदान पर वापस आए. चायकाल तक वह मिशेल मार्श के साथ टिके रहे. ऑस्ट्रेलिया ने चायकाल तक चार विकेट पर 153 रन बनाए थे.

दिन के आखिरी सत्र में जडेजा ने मार्श को पवेलियन भेजा. दूसरे छोर पर खड़े रेनशॉ ने अर्धशतक पूरा किया. वेड जिस तरह से संभलकर बल्लेबाजी कर रहे थे लग रहा था कि वह टिके रहेंगे, लेकिन उमेश की गेंद पर वह एलबीडब्ल्यू करार दे दिए गए.

मेजबानों को बड़ा विकेट अश्विन ने दिलाया. रेनशॉ उनकी गेंद पर स्लिप पर खड़े मुरली विजय के हाथों लपके गए. कैफी को यादव ने खाता भी नहीं खोलने दिया. अगली ही गेंद पर लॉयन भी पवेलियन लौट गए.

भारत उम्मीद लगाए बैठा था कि वह आखिरी विकेट भी जल्दी ले लेगा, लेकिन स्टार्क ने ऐसा नहीं होने दिया. उन्होंने अश्विन पर छक्का लगाया और फिर 88वें ओवर में जडेजा पर लगातार दो चौके और एक छक्का लगाया.

हेजलवुड ने उनका अच्छा साथ दिया और दोनों दिन का खेल खत्म होने तक टिके रहे.