उत्तराखंड में इस तरह से कई लोगों को घर बैठे ही मिल रहा रोजगार

उत्तराखंड में कुमाऊं के पर्वतीय अंचल में जहां फूलों की खेती अब तक व्यावसायिक रूप नहीं ले पाई है, वहीं छह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जयकोट गांव के लोग गुलाब की खेती कर घरों को महका रहे हैं। इस पहल से गांव के कई लोगों को घर बैठे ही रोजगार मिल रहा है और धीरे-धीरे पलायन की ओर बढ़ते कदम भी अब ठिठकने लगे हैं.

कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नारायण आश्रम के निकट स्थित जयकोट गांव कुछ समय पहले तक आलू और राजमा उत्पादन के लिए जाना जाता था। लेकिन, बाजार दूर होने के कारण कृषि उत्पादों को वहां तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था.

ढुलाई का खर्च ज्यादा होने की वजह से उत्पाद की कीमत लागत से कहीं अधिक हो जाती थी. ऐसे में ग्रामीणों ने कुछ नया करने की ठानी. इसके लिए गांव में खिलने वाले गुलाब के फूलों को चुना गया. फिर तमाम तकनीकी जानकारियां जुटाई गईं और धीरे-धीरे ग्रामीण स्वयं गुलाब जल तैयार करने लगे.

देहरादून स्थित लैब में इस गुलाब जल का परीक्षण कराया तो वहां से शत प्रतिशत शुद्धता की मुहर लग गई. फिर क्या था, उत्साहित ग्रामीणों ने गुलाब जल का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव में उत्पादित गुलाब जल की मार्केटिंग की तैयारी की जा रही है.

गुलाब जल तैयार कर रहे महेंद्र सिंह, रुकुम सिंह, जमन सिंह, दलीप सिंह, बहादुर सिंह, दलीप सिंह बड़ाल, गोपाल सिंह कार्की आदि ने बताया कि इस बार देशभर से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को गुलाब जल भेंटकर इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा.

ग्रामीणों की योजना निकट भविष्य में गुलाब का तेल तैयार करने की भी है. गुलाब की खेती और गुलाब जल का उत्पादन करने के बाद से सीमांत क्षेत्र में बसे जयकोट गांव के मजदूरी करते रहे परिवार अब अपने खेतों में गुलाब उगाकर आजीविका अर्जित करने लगे हैं. रोजगार के लिए बाहर जाना थम-सा गया है.