उत्तराखंड में मतदान के नए आंकड़े जारी, कहीं 01.35 फीसदी तो कहीं 99.21 प्रतिशत रहा मतदान

उत्तराखंड में 15 फरवरी को विधानसभा चुनावों के बाद जारी किए मतदान प्रतिशत के अपने 68 फीसदी के आंकड़ों में मंगलवार को छह दिन बाद सुधार करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य में इस बार केवल 65.64 प्रतिशत लोगों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

उत्तराखंड प्रदेश निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी इन आंकड़ों के अनुसार, इस बार का मत प्रतिशत पांच साल पहले वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में हुए 67.22 फीसदी मतदान के आंकड़े को भी नहीं छू सका.

हालांकि, मतदान वाले दिन प्रदेश निर्वाचन कार्यालय ने शाम पांच बजे तक पूरे प्रदेश में 68 फीसदी के साथ मत प्रतिशत का नया रिकॉर्ड बनने पर खुशी जाहिर करते हुए मतदान केंद्रों में मतदाताओं की कतारों के लगे होने और अंतिम आंकड़ों में मत प्रतिशत के बढ़ने की उम्मीद जताई थी.

देहरादून में इस संबंध में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हालांकि वर्ष 2012 की तुलना में मतदान प्रतिशत 67.22 की तुलना में घट कर 65.64 हो गया है, लेकिन 2012 में 42.20 लाख मतदाताओं की तुलना में कुल मतदाताओं की संख्या में साढ़े छह लाख की वृद्धि दर्ज की गई. 15 फरवरी को उत्तराखंड की 69 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु के बाद कर्णप्रयाग सीट पर स्थगित हुआ मतदान अब नौ मार्च को होगा.

ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के ऊधमसिंह नगर जिले में सर्वाधिक 75.79 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 52.81 प्रतिशत के साथ अल्मोड़ा सबसे निचले पायदान पर रहा.

राज्य में कुल 10685 मतदान केन्द्रों में से सात मतदान केन्द्रों पर शून्य मतदान रहा. उत्तरकाशी के पुरोला में चार, पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में एक, अल्मोड़ा के सोमेश्वर में एक एवं अल्मोड़ा में भी एक मतदान केन्द्र पर कोई वोट नहीं डाला गया.

हरिद्वार में पिरान कलियर विधानसभा क्षेत्र के हलवेहेरी मतदान केन्द्र में अधिकतम 99.21 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि नैनीताल के भीमताल विधानसभा क्षेत्र में कौंता मतदान केन्द्र में न्यूनतम 01.35 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ.