खाली हो गए पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले, अब वसूला जाएगा किराया

उत्तराखंड हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी आवास अब खाली हो गए हैं. लेकिन बकाया किराया और सुविधा शुल्क पूर्व मुख्यमंत्रियों को भरना पड़ सकता है. हाईकोर्ट ने 15 फरवरी तक आवास खाली करने के आदेश दिए थे और अब पन्द्रह दिन के भीतर राज्य सरकार से किराया वसूली पर जवाब मांगा है.

राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सरकारी आवास खाली कर दिए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक पहले ही आवास खाली कर चुके हैं. अब पूर्व सीएम एनडी तिवारी ने भी एफआरआई में मौजूद सरकारी आवास खाली करने की जानकारी हाईकोर्ट में दी है.

हालांकि दो दिन पहले ही एनड़ी तिवारी की ओर से बीमारी और ठंड का हवाला देते हुए 31 मार्च तक मोहलत मांगी गई थी लेकिन गुरुवार को आवास खाली करने की जानकारी दी गई. लम्बे समय से पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी आवास से जुड़ी जनहित याचिका पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे समाजसेवी अवधेश कौशल कहते हैं कि अभी किराया वसूली और सुविधा शुल्क की वसूली तक उनकी पहल जारी रहेगी.

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से बाजार रेट पर इन आवासों का किराया 15 दिन के भीतर बताने को कहा है. पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने 66 लाख, एनडी तिवारी ने 19 लाख, बीसी खंडूरी ने 27 लाख, रमेश पोखरियाल निशंक ने 43 लाख, विजय बहुगुणा ने 7 लाख 71 हजार की धनराशि खर्च की है. बिजली और टेलीफोन के बिल का भी बकाया लाखों में है.

फिलहाल हाईकोर्ट की सख्ती पूर्व मुख्यमंत्रियों पर भारी पड़ने वाली है. बंगले खाली होने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से 15 दिन के भीतर बाजार दर पर किराये की जानकारी देने को कहा है. वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ता बिजली, टेलीफोन और वाहनों पर हुए खर्च का हिसाब मांगने की प्रार्थना भी कोर्ट में करने की तैयारी में है.