‘उत्तराखंड में कांग्रेस अपनी हार मान चुकी है, इसलिए बड़े नेता प्रचार के लिए नहीं आ रहे’

बीजेपी ने बुधवार को कहा कि उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की अवश्यंभावी हार की जिम्मेदारी लेने से बचने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता राज्य में प्रचार नहीं कर रहे हैं.

राज्य में 15 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी प्रत्याशियों के समर्थन में मंगलवार से कई रैलियां करने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने अस्थायी राजधानी देहरादून में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘उत्तराखंड में कांग्रेस को केवल हरीश रावत और पीके (प्रशांत किशोर) पर छोड़ दिया गया है. पार्टी का कोई भी शीर्ष नेता चुनाव प्रचार के लिए राज्य में नहीं आ रहा है क्योंकि उन्हें यहां पार्टी की अवश्यंभावी हार के बारे में पता है.’

उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी जी भी यहां नहीं आ रहे हैं क्योंकि वह पार्टी को मिलने वाली बड़ी हार की जिम्मेदारी नहीं खुद पर नहीं लेना चाहते.’ अपनी चुनावी रैलियों में अल्पसंख्यकों सहित सभी वर्गों की भारी भीड़ उमड़ने का जिक्र करते हुए हुसैन ने कहा कि उत्तराखंड में दीवार पर लिखी इबारत दिन की रोशनी की तरफ साफ है.

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया, ‘जनता काम करने में विफल रही इस सरकार को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है.’ गांधी-नेहरू परिवार के सदस्यों के इस बार उत्तराखंड में पोस्टरों में भी गायब रहने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रचार में उनकी अनुपस्थिति यह दिखाती है कि वह अपनी हार मान चुके हैं और अपने सिर पर उसका बोझ नहीं उठाना चाहते.

कांग्रेस की चुनावी रैलियों में बमुश्किल एक हजार लोगों के जुटने का दावा करते हुए हुसैन ने कहा कि यही कारण है कि अपने दम पर भीड़ इकट्ठा करने में विफल रहने वाले राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की रैलियों में अक्सर अखिलेश यादव के साथ दिखाई देते हैं. उत्तराखंड को देश की सीमाओं की चौकसी करने वाली जनता की धरती बताते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि सत्ता में आने पर वह इस राज्य को विकास के पथ पर पीछे नहीं रहने देगी.

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदाय से चुनाव में कोई प्रत्याशी न उतारे जाने की बाबत पूछे जाने पर हुसैन ने कहा कि पार्टी द्वारा लिए गए किसी भी फैसले का आधार कभी धर्म नहीं होता. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिला होगा, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उन्हें धर्म के आधार पर अनदेखा किया गया. बीजेपी अपना कोई भी निर्णय धर्म के आधार पर नहीं करती.’

इस संबंध में उन्होंने याद दिलाया कि केवल 32 साल की उम्र में सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके ही नाम है.

राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी नाम को आगे न किए जाने के संबंध में पूछे जाने पर बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि बीजेपी के लिए यह कोई समस्या नहीं है और इस पद को संभालने के लिए पार्टी के पास राज्य में कई नेता हैं.

उन्होंने कहा, ‘जब हम सत्ता में आएंगे तो पार्टी का संसदीय बोर्ड इस बारे में फैसला ले लेगा, जैसा कि महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में किया गया था.’