सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार हाई कोर्ट जज के खिलाफ सुनवाई…

सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस जेएस खेहर ने मंगलवार को एक अभूतपूर्व कदम उठाया. उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के वर्तमान जज जस्टिस सीएस कर्णन के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह कार्रवाई मद्रास हाई के चीफ जस्टिस और दूसरे जजों के खिलाफ कर्णन की ओर से लगातार आरोप लगाए जाने के बाद लिया है.

इस केस की सुनवाई बुधवार से शुरू होगी. चीफ जस्टिस और छह अन्य सीनियर जज-जस्टिस दीपक मिश्रा, जे चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर, पीसी घोष और कुरियन जोसफ की बनी बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी. ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी अदालत ने सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज के खिलाफ अवमानना के मामले पर सुनवाई शुरू की है. इससे पहले, यही होता रहा है कि किसी वर्तमान जज के खिलाफ जांच रिपोर्ट मिलने के बाद चीफ जस्टिस ने संसद से सिफारिश की कि वह आरोपी जज को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करे.

कर्णन ने मद्रास हाई कोर्ट को 2015 में उस वक्त बड़ी मुसीबत में डाल दिया, जब उन्होंने चीफ जस्टिस संजय के कौल के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू करने की धमकी दी. कौल वही जज हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के लिए कलीजियम ने हाल ही में सिफारिश की थी. कर्णन ने आरोप लगाया था कि कौल उनके न्यायिक कार्यों में बाधा डाल रहे हैं. इसके अलावा, उन्होंने अन्य हाई कोर्ट जजों के खिलाफ कथित फर्जी शैक्षिक योग्यता के मामले में सीबीआई जांच की बात कही थी.

कर्णन ने यह भी आरोप लगाया था कि दलित होने की वजह से वह जातिगत भेदभाव के शिकार हुए हैं. उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसी क्रम में जब उनका ट्रांसफर हुआ तो कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ‘स्टे’ दे दिया. उन्होंने चीफ जस्टिस को सुझाव दिया कि वह उनके ‘न्यायिक क्षेत्र’ में दखल न दें. हालांकि, बाद में अपना रुख नरम करते हुए उन्होंने अपना ट्रांसफर स्वीकार कर लिया था.

कानून के जानकार किसी जज के खिलाफ कोर्ट द्वारा अवमानना का मामला चलाए जाने के नतीजे जानने के लिए उत्साहित हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट उन्हें अवमानना का दोषी पाता है तो क्या उन्हें सजा मिलेगी और जेल भेजा जाएगा? अगर जज को दोषी करार देते हुए उन्हें जेल भेजा गया तो बतौर हाई कोर्ट जज उनकी नौकरी अपने आप छिन जाएगी या सुप्रीम कोर्ट की बेंच संसद को जज को हटाने के लिए निर्देश देगी?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज को बर्खास्त करने की एक चरणबद्ध संवैधानिक प्रक्रिया है. इसके तहत, जज के खिलाफ संसद के हर सदन में दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास करना पड़ता है. आज तक तीन जजों के खिलाफ संसद में ऐसे प्रस्ताव आए, लेकिन किसी को अभी तक इस तरह हटाया नहीं गया. संसद के इस मामले में पहुंचने पर विवाद होने के आसार हैं क्योंकि आरोपी जज ने जातिगत आधार पर भेदभाव का शिकार होने का आरोप लगाया है.