चार्वाक, काका हाथरसी, संस्कृत श्लोकों के जरिए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर किए ताबड़तोड़ हमले

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को प्राचीन दार्शनिक चार्वाक की उक्ति, कवि काका हाथरसी की कविता और संस्कृत के श्लोकों के माध्यम से कांग्रेस पर तंज कसा और विपक्षी पार्टी की नीयत में खोट होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोई भी बड़ा काम करने के लिए पुरूषार्थ चाहिए जो वर्तमान सरकार में है.

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्षी कांग्रेस को आइने में झांकने की सलाह देते हुए काका हाथरसी की कविता पढ़ी. उन्होंने कहा कि वह काका हाथरसी की कविता का उल्लेख कर रहे हैं और इसे उत्तर प्रदेश चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाए.

उन्होंने कहा ‘अंतरपट में खोजिए छिपा हुआ है खोट मिल जाएगी आपको बिल्कुल सत्य रिपोर्ट’ मोदी ने कहा कि हमारी ओर से किसी कार्यक्रम और योजना का जिक्र होता है तब उस ओर (कांग्रेस) से आवाज आती है कि यह तो हमारे समय था, यह तो हमारे समय था. ‘मैं भी आपकी तरह कुछ खेलने का प्रयास करता हूं. आपके मैदान में ही खेलता हूं.’ प्रधानमंत्री ने इसके बाद वर्तमान और पूर्व सरकारों की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के दौरान नीयत और कार्य संस्कृति में फर्क आया है.

उन्होंने महाभारत के एक उद्धरण का जिक्र करते हुए कि धर्म सब जानते हैं, आप भी जानते हैं लेकिन वह आपकी प्रवृत्ति नहीं थी. अधर्म क्या है, वह भी सब जानते हैं, आप भी जानते हैं लेकिन उसे छोड़ने का आपका सामर्थ्य नहीं था.

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का यह श्लोक भी पढ़ा, ‘उद्यमेन ही सिद्धंति, कार्याणि न मनोरथ:। न हि सुप्तस्य सिंहस्य: प्रविशन्ति मुखे मृगा:।’ उन्होंने कहा कि सोये हुए शेर के मुख में हिरण खुद से नहीं आता, उसे भी आकर शिकार करना पड़ता है.

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है- ‘अमंत्रं अक्षरं नास्ति, नास्ति मूलं अनौषधं।

अयोग्य: पुरुष: नास्ति, योजक: तत्र दुर्लभ:।’ उन्होंने कहा कि कोई ऐसा अक्षर नहीं है जो मंत्रों में जगह नहीं पा सके, कोई ऐसा मूल नहीं होता जो औषधि में जगह नहीं पा सके, कोई इंसान ऐसा नहीं होता जो समाज को कुछ दे न सके. जरूरत योजना की है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमको चुनाव की नहीं, देश की चिंता है, इसलिए हम निर्णय लेते हैं. हमने जो फैसले किए हैं, उसके परिणाम भी आ रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि चार्वाक का यह मंत्र कुछ लोगों के मन में बैठ गया है.

‘यावत जीवेत, सुखं जीवेत, रिणं कृत्वा घृतं पिवेत।’ उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि जब तक जीयो, मौज करो. चिंता किस बात की. कर्ज लो और घी पीयो.